जसवंतनगर (इटावा)। यमुना नदी के बीहड़ी क्षेत्र में उगने वाली सब्जी ककोरा (औषधीय फल) इस समय बाजार में खूब बिक रहा है। बीहड़ में झाड़ियों के बीच उगने वाले ककोरा न सिर्फ लोगों की थालियों का स्वाद बढ़ा रहा है बल्कि ग्रामीणों के लिए कमाई का भी जरिया बना हुआ है। गांव के लोग इस समय बीहड़ से ककोरा तोड़कर प्रतिदिन तीन से पांच सौ रुपए तक कमा रहे हैं।
जसवंतनगर, बलरई, चकरनगर, उदी सहित आसपास के बीहड़ी क्षेत्र से सटे गांवों के लोग सुबह से ही बीहड़ में ककोरा तोड़ने के लिए चले जाते हैं। इसके बाद बाजार में ककोरा ले जाकर इसकी बिक्री करते हैं। ऐसे में ग्रामीण बेरोजगारों को इस समय अच्छा रोजगार मिल रहा है। थोक व्यापारी इसे दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, भोपाल जैसे शहरों तक ले जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। ककोरा को औषधीय गुणों वाला फल भी माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, मिनरल्स और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि ककोरा आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है। साथ ही इसके सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है और मौसमी बीमारियों से शरीर को लड़ने की ताकत मिलती है। (संवाद)