बैंकों में करेंसी की किल्लत अब रुलाने लगी है। साप्ताहिक अवकाश के दूसरे दिन बैंक खुले तो भुगतान के लिए खाताधारकों की भीड़ उमड़ी। करेंसी की कमी के चलते लोगों को 24 हजार का भुगतान किसी भी बैंक में संभव नहीं हो सका। बैंक चार हजार से दस हजार रुपये का भुगतान कर किसी तरह से काम निपटाते नजर आए। शहर की बैंक आफ बड़ौदा आदर्श नगर, देना बैंक आदर्श नगर, यूनियन बैंक हिरन नगर, बैंक आफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक में तो कैश की किल्लत के चलते पांच हजार का भुगतान ही खाताधारक को किया जा सका। जिनके घरों में शादी है उन खाताधारक को मैनेजर ने 24 हजार का विड्राल कागजी औपचारिकता पूरा करने के बाद जरूर किया। हर जुबां पर बस एक ही बात थी कि आखिर कब तक आरबीआई से करेंसी आएगी और समय से मनमाफिक भुगतान मिल सकेगा। फिलहाल बैंक अधिकारी करेंसी उपलब्धता पर कोई सटीक जवाब नहीं दे सके।
आठ नवंबर के ऐलान के ठीक बाद पीएम ने पर्याप्त करेंसी होने का दावा किया था। दावा फिलहाल कोरा साबित हो रहा है। करीब दस दिनों से बैंकों में कैश की किल्लत इस कदर हावी है कि दस हजार का भुगतान करने से भी मैनेजर हाथ खींचे हैं। सोमवार को पीएनबी व एसबीआई शाखा में पेंशनर्स के साथ ही वेतनभोगियों की लंबी कतार थी। तो वहीं साधारण खाताधारकों की भीड़ में कमी के चलते ज्यादा मारामारी नहीं हो सकी। कैश की किल्लत के बीच कतार में लगे पेंशनर्स व वेतनभोगियों को पांचवें दिन भी बैंक पांच से दस हजार का भुगतान ही कर सकी। घंटों लाइन में जूझने के बाद दो से पांच हजार की रकम हाथ में मिलती तो लोगों में गुस्सा साफ झलक रहा था। कई दिन से कैश की कमी से दो चार हो रहे लोगों को घर खर्च के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के लिए भटकन पड़ रहा है। उधर ग्रामीण इलाकों में हालात और भी बदतर हैं। कहीं-कहीं कैश वैन पहुंचने पर लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिल रही है, लेकिन मांग को देखते हुए वैन पहुंचने की संख्या न के बराबर है।
पीएनबी ने एक हजार रुपये का ही किया भुगतान
सोमवार की सुबह के समय तो बैकों में भीड़ उमड़ी लेकिन दोपहर होने तक भीड़ छट चुकी थी। भीड़ की मारामारी खत्म होने का कारण बैंकों में कैश की किल्लत होना था। एसबीआई मुख्य शाखा से लेकर पीएनबी समेत अन्य बैंकों ने तिजोरी हल्की देख दोपहर बाद नगदी भुगतान से हाथ खींच लिए थे। पीएनबी जवाहरनगर में कैश की किल्लत के चलते 1 हजार से ज्यादा का भुगतान मैनेजर नहीं कर सके। जिसको लेकर मैनेजर व खाताधारकों में आपसी मुहांचाही भी खूब हुई। जिस खाताधारक के बेटे या बेटी की शादी थी। उसे 24 हजार का भुगतान जरूर किया। एसबीआई ने दोपहर तक 24 हजार विड्राल का भुगतान किया लेकिन बाद में पांच से दस हजार का भुगतान सीमित कर दिया। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
फोटो परिचय-9, कचहरी रोड पर एटीएम में लगी कतार।
शहर के एटीएम भी बने शोपीस
बैंकों के साथ ही एटीएम बूथ भी कैशलेस हो चुके हैं। सोमवार को भी कैश की कमी ने लोगों को खूब छकाया। बैंक एक से पांच हजार का भुगतान कर जैसे तैसे काम चला रहे थे। तो वहीं अधिकतर एटीएम शोपीस बने रहे। एसबीआई के एटीएम में करेंसी होने से यहां मारामारी के हालात बने रहे। यही नहीं कतार में लगे लोगों में आपसी धक्का-मुक्की सामान्य बात रही।
बैंक ने दिए पांच सौ तो लोगों का चढ़ा पारा
चकलंवशी। कस्बा स्थित ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त शाखा तीन दिन से कैश की किल्लत से जूझ रही है। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को बैंक खुलने के पहले ही परिसर में सैकड़ों खाताधारक कतार में लग चुक थे। भीड़ देख बैंक कर्मचारियों ने पांच सौ रुपये का भुगतान करना शुरू किया तो लोगों का गुस्सा उबाल मार गया। बैंक कर्मियों को खरी खोटी सुनाते हुए शोरशराबा करने लगे। शाखा प्रबंधक ने कैश न होने की बात समझाकर हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया। खाताधारक रामप्रसाद, शिवप्रकाश, जगदीश, कमलेश, राकेश, अवधेश, केशन, रामरती,शिवकली आदि ने बताया कि एक सप्ताह से दो से तीन हजार का भुगतान ही बैंक से मिल पा रहा है। इससे घर खर्च तक को तरसना पड़ रहा है।
आधीरात से लाइन में लगे, हाथ लगी मायूसी
गंजमुरादाबाद । नगर की बैंक आफ इंडिया शाखा में न तो शनिवार को कैश आया और ना ही सोमवार को। दोनों दिन मध्यरात्रि से शाखा के बाहर लाइन लगाकर खड़े सैकड़ों लोगों को पांच घंटे बाद खाली हाथ ही बैरंग लौटना पड़ा। मालूम हो कि नगर की बैंक आफ इंडिया शाखा के बाहर 10 नवंबर से ही रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं। कई-कई दिन शाखा में कैश नहीं आ रहा है। अधिकांश ग्राहकों का समय बैंक में लाइन लगाने में ही बीत रहा है। शुक्रवार को इस शाखा में कैश आया था। इसके बाद शनिवार व सोमवार को बैंकों कों कैश नहीं मिला। लोगों की जेबों में फ ूटी कौड़ी न बचने के कारण सोमवार को अर्धरात्रि से ही शाखा के बाहर कैश की आस में भारी संख्या में जरुरतमंद लाइन लगाकर खड़े हो गए थे। सोमवार सुबह 10 बजे बैंक खुली तो शाखा प्रबंधक सुभाष चंद्र ने कैश न आने की बात कही। इससे लोग आक्रोशित हो गए और प्रबंधक को कोसने लगे। बाद में मैनेजर ने सभी को समझा-बुझाकर शांत किया।