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हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जांच

Tue, 10 May 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव।
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विदेशों में जमा पीटर-इंद्राणी के धन जांच हो सकती है - फोटो : gettyimages
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा के तहत 40 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों की जांच शुरू की थी। इसी के तहत स्थानीय अफसरों ने वर्ष 2008-09 में सफीपुर की मुंडा ग्राम पंचायत में मनरेगा से लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग कार्य कराने की जानकारी सीबीआई को दी गई थी।
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बता दें कि प्रदेश के सात जिलों सोनभद्र, मिर्जापुर, बलरामपुर, गोंडा, महोबा, संतकबीरनगर व कुशीनगर में मनरेगा धन में करोड़ों का घोटाला मिलने के बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

जांच के दौरान सीबीआई को इन जिलों में मनरेगा में करोड़ों के घोटाले की जानकारी हुई थी। प्रदेश के कई जिलों में विभिन्न पदों पर तैनात रहे आईएएस व पीसीएस अफसरों पर शिकंजा कसा गया था।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रदेश के अन्य जिलों में भी वर्ष 2007 से 2010 के बीच उन मनरेगा कार्यों की जांच के आदेश दिए, जिसमें 40 लाख रुपये से अधिक की रकम खर्च की गई है।

इसके बाद सीबीआई ने जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा से हुए खर्च का ब्योरा मांगा था। जिसमें सफीपुर की मुंडा ग्राम पंचायत में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से इंटरलाकिंग बिछाने का काम भी शामिल था।

3 फरवरी 2016 को इसी कार्य की जांच को सीबीआई देहरादून के एसपी सुजीत कुमार जिला पंचायत कार्यालय आए थे। यहां पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी कुसुमवाल, एई वजीरुद्दीन के अलावा कई अन्य अधिकारियों व बाबूओं से कार्य की जानकारी लेकर विस्तृत ढंग से पूछताछ की थी। सोमवार कोे सीबीआई इसी कार्य की स्थलीय जांच के लिए मुंडा गांव पहुंची और कराए गए कार्यों की स्थलीय नापजोख कराई।
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