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Unnao News: आवासहीन कर रहे इंतजार, कब होगा अपना घर-द्वार

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उन्नाव। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के आवासहीन परिवारों को इंतजार करते हुए पांच साल बीत गए, लेकिन अपना घर-द्वार होने का सपना अबतक पूरा नहीं हो पाया।
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यूएसडीए (उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) ने मार्च 2023 तक काम पूरा करने की बात कही थी। लेकिन कभी बजट की कमी तो कभी जमीन का रोड़ा अटक गया। इसी का नतीजा है कि पांच साल में महज पचास फीसदी निर्माण हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी कम से कम छह महीने और लगेंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत यूएसडीए को वर्ष 2018 में 720 आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए 33 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। वर्ष 2018 में ही पहली किस्त में शासन से यूएसडीए को केवल 7.20 करोड़ रुपये मिले थे। इसके बाद कांशीराम कॉलोनी के पास आवासों की चार मंजिला कॉलोनी बनाने का काम शुरू हुआ।
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कोशिशों के बाद भी बजट न मिलने से निर्माण कार्य रुक गया। इसके बाद मार्च 2021 में शासन ने 3.2 करोड़ रुपये और नवंबर 2022 में 11 करोड़ 48 लाख रुपये और जारी किए। यूएसडीए ने छह करोड़ रुपये अपनी तरफ से जारी किए तो निर्माण कार्य में तेजी आई। लेकिन कुछ महीने बाद ही निर्माण के लिए चिन्हित जमीन का रोड़ा अटक गया। इससे चार मंजिला दो ब्लॉकों में 96 आवासों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
वहीं, निर्माणाधीन 624 आवासों में बजट की कमी फिर रोड़ा बन गई। हालत यह है कि जिस आवासीय योजना को मार्च 2023 तक बनाकर तैयार करने का लक्ष्य था उसमें अभी तक पचास फीसदी ही काम हो पाया है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि 624 आवासों में बिजली की वायरिंग, पाइप लाइन, प्लॉस्टर आदि का ही काम बाकी बचा है।
सहायक अभियंता रामगोविंद राजपूत ने बताया कि आवासीय योजना का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसी को बजट जारी होने में कुछ तकनीकी दिक्कतें होने से काम में तेजी नहीं आ सकी। बताया कि बजट और जमीन का मसला हल हो गया है, इसे छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
योजना के तहत 720 आवास के सापेक्ष 1,112 लोगों ने आवेदन किया था। यूएसडीए ने फरवरी 2020 में लाटरी प्रक्रिया से आवासों का आवंटन किया। सभी आवेदकों से जरूरी अभिलेख जमा कराए और पोर्टल पर अपलोड किया गया, लेकिन कई साल से इंतजार करते थक चुके लोग अब मायूस हैं। इसी का नतीजा है कि आवेदक मकान की किस्त जमा करने में रुचि नहीं लो रहे हैं। 270 लोगों नें ही किस्त जमा की है।
बोले आवेदक
आजाद नगर के राजकुमार ने बताया कि वह किराए पर रह रहे हैं। आवास के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी नहीं मिल पाया है। अगर घर मिल गया होता तो जो दो हजार रुपये महिना वह मकान के लिए दे रहे हैं, उससे मकान की किस्त जमा करते तो अपने काम आता।
पूरन नगर निवासी सावित्री ने बताया कि उनके पति सब्जी विक्रेता हैं। घर मिल जाता तो अब तक पांच साल में जो किराए पर खर्च किया, उससे अपने मकान के लिए जमा करते। आवास न मिलने से परिवार भी परेशान है।
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