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Unnao News: फार्मेसी कॉलेज के नाम पर चल रहा था फर्जी डिग्री बेचने का धंधा

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बेहटामुजावार। छात्रों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें डीफार्मा की फर्जी डिग्री देने वाले फार्मेसी काॅलेज की बिल्डिंग से कॉलेज कम और फर्जी डिग्री बेचने की दुकान ज्यादा नजर आती है। पूरे परिसर में जंगली और गंदगी है। 10 कमरे बने हैं और पांच अधबने पड़े हैं। गांव के लोगों ने बताया कि यहां कभी छात्रों को पढ़ते नहीं देखा गया। वहीं, प्रबंधक और लिपिक के जेल जाने के दूसरे दिन कई और युवाओं ने सीओ को फोन कर धोखाधड़ी की जानकारी दी। सीओ के मुताबिक, सभी से लिखित शिकायत देने को कहा गया है।
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हरदोई जिले के थाना कासिमपुर निवासी प्रशांत मिश्रा ने बेहटामुजावर थाना के अटवावैक गांव स्थित दुर्गा प्रसाद रामरूप एलोपैथिक फार्मेसी कॉलेज के प्रबंधक और लिपिक पर डी-फार्मा की फर्जी मार्कशीट देने की शिकायत की थी। बांगरमऊ सीओ अरविंद चौरसिया ने जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। इस पर शुक्रवार को अटवावैक गांव निवासी कॉलेज प्रबंधक तेजकुमार और प्रधान लिपिक अवध प्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पीड़ित छात्र से दो साल के कोर्स के लिए हर 1.80 लाख रुपये लिए गए थे और एडमिशन लेने से एक साल पहले की मार्कशीट दे दी थी।
गांव के बाहर बने इस कॉलेज की बिल्डिंग खस्ताहाल है। यहां कॉलेज के नाम पर 10 कमरे ही हैं और कुर्सियां और स्टाफ तक नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि किसी दूसरे प्रदेश में पंजीकृत प्राइवेट युनिवर्सिटी से मिलीभगत करके गोरखधंधा किया जा रहा था। सीओ ने बताया कि एफआईआर और जेल जाने के बाद अन्य पीड़ित भी सामने आने की हिम्मत जुटाने लगे हैं। बताया कि शनिवार को चार-पांच लोगों के फोन आए और उन्होंने अपने साथ भी धोखाधड़ी होने की शिकायत की है। बताया कि सभी से लिखित शिकायत देने को कहा गया है।
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फर्जी डिग्री और प्लॉटिंग की कमाई से बनाया गेस्ट हाउस
बेहटामुजावार। गांव और आसपास के लोगों ने बताया कि तेज कुमार ने फर्जी डिग्री कॉलेज और प्लाटिंग से काफी कमाई की। एक साल पहले संडीला रोड पर एक गेस्ट हाउस भी बनवाया है। लोगों ने बताया कि तेज अपने पिता की इकलौती संतान है। 2004 में बीए-बीएससी का महाविद्यालय खोला। लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली और 2016 में बंद कर दिया। इसके बाद उसने प्लाटिंग का काम शुरू किया और काफी रुपये कमाए। इसके बाद 2017 में इसी पुराने महाविद्यालय की बिल्डिंग में फार्मेसी कॉलेज का बोर्ड लगाकर फर्जी डिग्री को कमाई का जरिया बनाया। ग्रामीणों ने बताया कि इस कॉलेज प्रबंधक के पास केवल आठ-दस बीघा ही जमीन है। एक साल पहले संडीला मार्ग पर एक गेस्ट हाउस भी बनवाया है। (संवाद)
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