पूरे कुएं में भांग घुली है। देश की दूसरी सबसे बड़ी स्टेट बैंक आफ इंडिया में कामकाज का हाल चौंकाने वाला है। यहां खुले छात्रवृत्ति के खातों में करीब डेढ़ साल से जमा-निकासी की कोई इंट्री ही नहीं हुई। छात्रवृत्ति की इंट्री न होने से नाराज एक स्कूल के करीब दो सैकड़ा बच्चों ने बुधवार को मियागंज ब्लॉक के परेंदा स्थित एसबीआई शाखा के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने बताया कि जमा-निकासी की इंट्री न होने से उन्हें यह पता नहीं चलता है किस महीने की छात्रवृत्ति खाते में आई और किस महीने की शेष है। बैंक मैनेजर ने प्रिंटर काम न करने की समस्या बताते हुए जल्द से जल्द व्यवस्था ठीक करने का आश्वासन दिया। इसके बाद बच्चे शांत हुए।
मियागंज ब्लॉक के परेंदा गांव स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में परेंदा, अमेठनगढ़ी, सीपतपुर, सिलई, जरेलिया, मुस्तफाबाद, निसभी, रावतपुर सरौंहां, बिरसिंगपुर समेत दर्जन भर से अधिक गांव के लोगों ने अपने खाते खोल रखे हैं। छात्रवृत्ति के अलावा पेंशन, आवास, एमडीएम का पैसा सीधे लोगों के खाते में आता है। करीब डेढ़ साल से लोगों की पासबुक में जमा-निकासी की इंट्री नहीं हो पाई। बार-बार दौड़भाग करने के बाद भी पासबुक इंट्री न होने से नाराज परेंदा गांव स्थित राजा विश्वनाथ बक्श सिंह प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल के करीब दो सौ छात्र-छात्राएं अपनी पासबुक लेकर बुधवार दोपहर करीब 12 बजे बैंक पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। करीब एक घंटा तक हंगामा चलता रहा। स्कूल के प्रधानाचार्य ओमप्रकाश दीक्षित ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रयास किया, लेकिन इंट्री नहीं की गई। आरोप लगाया कि वह बच्चों की पासबुक लेकर बैंक आते हैं तो कर्मचारी गलत भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के अभिभावक उन पर खाते में जमा-निकासी का ब्योरा दर्ज कराने की बात कहते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा न होने से बच्चे और उनके अभिभावक उन्हें ही दोषी मानते हैं। बैंक मैनेजर दिनेश शुक्ला ने छात्रों को बताया कि बिजली की अत्यधिक समस्या होने से सोलर सिस्टम से इन्वर्टर चार्ज किया जाता है। बताया कि इससे प्रिंटर नहीं चल पाता। उन्होंने जल्द ही समस्या हल किए जाने का आश्वासन दिया तब मामला शांत हुआ। बैंक में प्रदर्शन और हंगामा की सूचना पर माखी थाना पुलिस भी पहुंची और मामला शांत होने तक डटी रही।