समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने विधानसभा चुनाव 2017 के जारी की गई लिस्ट में उन्नाव जिले के भी तीन सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। सपा ने मोहान सुरक्षित सीट से पूर्व घोषित प्रत्याशी भगवती प्रसाद का टिकट काटते हुए उनके स्थान पर हसनगंज ब्लाक प्रमुख के पति सेवकलाल रावत को टिकट दिया है। जबकि पुरवा सीट से वर्तमान विधायक उदयराज यादव पर विश्वास जताते हुए फिर टिकट दिया है। उदयराज पुरवा से चौथी बार विधायक हैं। 2017 के चुनाव में वह पांचवीं बार किस्मत आजमाएंगे। हालांकि पार्टी को विश्वास है कि जनता में उनकी लोकप्रियता और पकड़ के चलते वह फिर चुनाव में बाजी मारेंगे। वही उन्नाव सदर सीट से पूर्व सांसद व विधायक स्व. दीपक कुमार की पत्नी मनीषा दीपक को टिकट दिया है। मनीषा ने पति के निधन के बाद पहली बार राजनीति में कदम रखा था। पार्टी के टिकट पर उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पंकज गुप्ता की जीत हुई और मनीषा रनर रही थीं। हालांकि चुनावी हार के बावजूद उन्होंने लोगों के बीच पकड़ मजबूत की और इसी का नतीजा है कि पार्टी ने उनपर फिर विश्वास जताया।
मोहान में चचेरे भाई होंगे आमने-सामने
सेवक लाल की वर्तमान बसपा विधायक राधेलाल से होगी होगी टक्कर
मोहान (सुरक्षित) सीट से प्रत्याशी घोषित किए गए सेवक लाल गौतम कस्टम विभाग से रिटायर अधिकारी हैं। वह 2011 में कस्टम से अप्रेजर पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने 2007 में अपने चचेरे भाई वर्तमान में बसपा से विधायक राधेलाल रावत को चुनाव लड़ाया था। जब पूरे जिले में सपा का परचम लहराया था तब मोहान (पूर्व में हसनगंज) से बसपा से राधेराल ने 18 हजार वोट से चुनाव जीता था। 2012 के विधानसभा चुनाव में भी राधेलाल अकेले ही जिले में बसपा का खाता खोल पाए थे। हालांकि इस चुनाव के बाद दोनों चचेरे भाईयों (सेवक लाल व राधेलाल) में दूरियां बढ़ गईं। पिछले पंचायत चुनाव में सेवकाल ने खुद राजनीति में कदम रखा और पत्नी सोना रावत को ब्लाक प्रमुख बनाया। अमर उजाला से बातचीत करते हुए सेवकलाल ने पार्टी खासकर पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव का आभार जताया। कहा कि एक लाख पासी बिरादरी के वोटर उनकी जीत का आधार बनेंगे।
उदयराज के लिए लगातार पांचवीं जीत की चुनौती
पुरवा विधानसभा सीट से घोषित प्रत्याशी उदयराज यादव का यह पांचवां विधानसभा चुनाव होगा। 2012 में जातीय समीकरणों और जनता के साथ की बदौलत वह लगातार चौथी बार चुनाव जीते थे। खास बात यह है कि उन्हीं की ग्राम पंचायत लऊआ सिंघनखेड़ा के रहने वाले भाजपा नेता ह्रदयनरायण दीक्षित उनसे पहले चार बार विधायक रहे थे। उदयराज के लिए चुनौती यह है कि वह पांचवीं बार विधायक बनकर पुरवा विधानसभा में अब तक सबसे अधिक बार विधायक बनने का रिकार्ड बना पाते हैं या नहीं। 2012 के चुनाव में उन्होंने बसपा प्रत्याशी को करीब 29 हजार वोट से हराया था। उदयराज यादव ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि वह क्षेत्र के विकास और जनता के विश्वास के बल पर फिर चुनाव जीतेंगे।
मनीषा पर विरासत बचाने की जिम्मेदारी
सदर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित हुईं मनीषा दीपक के ससुर स्व. मनोहर लाल सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खास लोगों में शुमार किए जाते थे। वह कई बार मंत्री भी रहे। मनोहर लाल के बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे स्व. दीपक कुमार ने संभाली थी। दीपक कुमार उन्नाव सदर से चुनाव लड़ते रहे वह एकबार सांसद भी रहे थे। दीपक कुमार 2012 के चुनाव में सदर विधानसभा से फिर विधायक बने लेकिन बीमारी के चलते उनके निधन के बाद रिक्त हुई सीट पर 2014 में लोकसभा चुनाव के साथ ही हुए विधानसभा के उपचुनाव में सपा ने दीपक कुमार की पत्नी मनीषा दीपक को प्रत्याशी बनाकर उपचुनाव उतारा लेकिन मोदी लहर के चलते मनीषा दीपक को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी पंकज गुप्ता 198022 वोट पाकर जीते जबकि 54629 वोट पाकर मनीषा दीपक रनर रहीं थीं। हालांकि इसबार उन्हें अपनी और पार्टी की जीत का पूरा भरोसा है।
सीएम ने दिया है भरोसा, फेवर में होंगे हालात, भगवती
मोहान विधानसभा सीट से टिकट कटने के बाद भी भगवती प्रसाद को भरोसा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनकी प्रत्याशिता पर आंच नहीं आने देंगे। अमर उजाला से बात में भगवती प्रसाद ने कहा कि 2012 के चुनाव में वह महज 4100 वोट से चुनाव हारे थे। उनका मानना है कि 2017 के चुनाव में उन्हें लगातार पांच साल तक क्षेत्र की जनता के बीच रहने और सरकार के चौमुखी विकास का लाभ मिलने वाला है। वह अभी भी खुद की हो प्रत्याशी मान रहे हैं। बताया कि टिकट कटने की जानकारी होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से फोन पर बात की है। सीएम ने भरोसा दिलाया है कि चुनाव वही लड़ेंगे। मूल रूप से पुरवा विधानसभा क्षेत्र के दरहेटा गांव के रहने वाले भगवती सिंह इसे टिकट कटने की वजह नहीं मानते हैं। बताया कि उन्होंने हसनगंज कस्बा में तहसील के सामने 47 लाख की जमीन खरीदी है और वहीं मकान भी बनाकर रहते हैं तो बाहरी कैसे हुए। कहा कि एक-दो दिनों में हालात उनके फेवर में होंगे।
तीन अन्य सीटों पर है इंतजार
निकाले जा रहे अलग-अलग सियासी मायने
अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। जिले की तीन अन्य सीटों बांगरमऊ, सफीपुर और भगवंतनगर के लिए प्रत्याशी घोषित न होने से अपना टिकट पक्का मान रहे वर्तमान विधायकों में ही नहीं पार्टी के भीतर भी खलबली मची है। कोई इसे कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीद से जोड़ रहा है तो कोई सपा की ओर से कराई गई पार्टी की परमारमेंस रिपोर्ट का नतीजा बता रहा है। बताया जा रहा है कि इन सीटों पर वर्तमान सपा विधायक अपना टिकट स्वयं अपना टिकट पक्का भले ही मान रहे हों लेकिन पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। वह जनता का मूड और क्षेत्र में पकड़ रखने वाले को ही प्रत्याशी बनाएगी। बांगरमऊ से वर्तमान विधायक बदलू खां, पार्टी में धड़ेबाजी के शिकार हैं। सूत्रों के अनुसार सपा यहां से एक अन्य मुस्लिम को ही टिकट देने की तैयारी में है। सफीपुर विधायक सुधीर रावत वर्तमान में प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी में सरकार और संगठन में चल रही खींचतान में वह भी शिकार हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि भगवंतनगर में पार्टी वर्तमान विधायक को ही टिकट देने की तैयारी में है लेकिन इसके लिए उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा।