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Unnao News: लोगों को भा रहा रहा थाई प्रजाति का अमरूद

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पुरवा (उन्नाव)। विकासखंड के दो गांवों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं थाई प्रजाति के अमरूद की बागवानी कर रही हैं। इस अमरूद में शुगर की मात्रा कम होने का दावा भी है। बाजार में इसकी काफी मांग होने से महिलाओं की आय में बढ़ोतरी हुई है।
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बहरौरा बुजुर्ग व बसनोहा में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नवंबर 2021 में मध्यप्रदेश के रतलाम से अमरूद की पौध लाई थीं। आठ-आठ फीट में पौधे लगाए। एक साल में पौधों में फल आना शुरू हो गए।
बसनोहा की राजकुमारी ने बताया कि 18 बिसुवा भूमि पर 300 पौधे लगाए थे। साल में दो बार फल आते हैं। खाने में अमरूद मुलायम और काफी स्वादिष्ट है। अमरूद पुरवा, मौरावां व उन्नाव की मंडी में बेच रही हैं। कुछ दिन पहले लखनऊ की प्रदर्शनी में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अमरूद की प्रशंसा की थी।
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राजकुमारी ने कहा कि जल्द ही अमरूद से जैम बनाना शुरू करेंगी। वह और समूह की अन्य महिलाएं इसका प्रशिक्षण भी ले चुकी हैं। बहरौरा बुजुर्ग की महिला जदुराई ने भी डेढ़ बीघे में 150 अमरूद के पौधे लगाए हैं और उनमें फल लगना शुरू हो गए हैं। इसी प्रकार चन्ना देवी व प्रेमलता भी अमरूद की खेती कर रही हैं। एनआरएलएम के ब्लॉक मिशन प्रबंधक विनय शर्मा ने बताया कि अमरूद की खेती करके महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
इंसेट
एक पेड़ में लगते हैं सात किलो फल
थाई प्रजाति के पेड़ में करीब सात किग्रा अमरूद लगते हैं। एक फल का वजन करीब 600 ग्राम होता है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब 10 महिलाएं अमरूद की खेती कर रही हैं।
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