-अभी तक तबादला नीति के विपरीत चल रहा था संबद्धीकरण का खेल
-शिकायत के बाद ग्राम्य विकास आयुक्त के आदेश पर हुआ तबादला
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। जिला विकास अधिकारी कार्यालय में नियमों का उल्लंघन कर जिला मुख्यालय पर संबद्ध किए गए वरिष्ठ सहायक, प्रधान सहायक सहित दस लिपिकों को शासन के निर्देश पर उनकी मूल तैनाती वाले विकास खंडों में भेजा गया है। कार्रवाई वार्षिक स्थानांतरण नीति की अनदेखी और संबद्धीकरण के खेल का खुलासा होने के बाद हुई है। ग्राम्य विकास आयुक्त ने दोषियों के खिलाफ आरोप पत्र देने का भी निर्देश दिया है।
जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालयों में स्थानांतरण नीति का पालन न होने की शिकायतें लंबे समय से शासन तक पहुंच रही थीं। नीति के अनुसार, प्रत्येक तीन वर्ष पर पटल प्रभारी का परिवर्तन अनिवार्य है लेकिन जनपद में इस नियम की अनदेखी कर चहेतों को उनके मनमुताबिक विभाग और पटल पर संबद्ध कर दिया गया। विकास विभाग के कई बाबू कागजों में विकास खंड स्तर पर तैनात दिखाए जाते हैं। पंचायत सचिव संवर्ग के कर्मचारियों में अभिषेक तिवारी, सुनील कुमार, देवेंद्र सिंह, मयूरी, पुत्तन लाल पाल तथा राम सागर यादव को भी जिला मुख्यालय पर संबद्ध कर रखा गया था।
30 जनवरी को आयुक्त ग्राम्य विकास जिलाधिकारी गौरांग राठी को दोषियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया था। इसके बाद जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी ने 12 फरवरी को दस बाबुओं को उनकी मूल तैनाती के स्थान पर भेजा है।
इनका हुआ तबादला
अनुराग सिंह प्रधान सहायक, हुकम सिंह प्रधान सहायक, शिवकुमार वरिष्ठ सहायक, दीपक सिंह वरिष्ठ सहायक, आरती वर्मा वरिष्ठ सहायक, अर्पित कुशवाहा कनिष्ठ सहायक, हीरा सिंह वरिष्ठ सहायक, शब्बीर अंसारी उर्दू अनुवादक सह वरिष्ठ सहायक, बिलाल अख्तर उर्दू अनुवादक वरिष्ठ सहायक, अंजुमन आरा उर्दू अनुवादक, इकबाल अहमद उर्दू अनुवादक सह वरिष्ठ सहायक, सुनील कुमार शुक्ला वरिष्ठ सहायक और प्रतिभा कनिष्ठ सहायक शामिल हैं।