सोहरामऊ। हसनगंज तहसील क्षेत्र के किसान सूखा राहत का चेक पाने के लिए महीनों से तहसील के चक्कर लगा रहे है। किसानों का कहना है कि क्षेत्रीय लेखपाल चेक जारी न होने की बात बता रहे हैं जबकि अधिकारी बजट का रोना रो रहे हैं।
हसनगंज तहसील क्षेत्र तमाम गांवों के किसान पिछले रबी सीजन में पड़े सूखे की मिलने वाली राहत राशि का इंतजार कर रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए किसान मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। तहसील क्षेत्र के गांव गौरी, सलोनेपुर, देवीपुर, खड़वारी, जसमड़ा, रामपुर सहित तमाम ऐसे गांव हैं जहां के किसानों को सूखा राहत के चेक नहीं मिले। तहसील और लेखपाल के चक्कर लगाने में सैकड़ों रुपये खर्च हो गए।
देवीपुर गांव ऐसा है जहां के करीब दो सौ काश्तकारों को सूखा राहत के नाम पर कुछ नहीं मिला। यहां रहने वाले बुद्धा राठौर ने बताया कि राहत के नाम पर जो रकम दी जा रही है उससे फसल के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती थी। लेकिन जो राहत मिलनी थी वह भी नसीब नहीं हुई।
इसी गांव के किसान राजू व सुनील ने बताया कि सूखा राहत की जो रकम किसानों को दी जा रही है उससे खाद या बीज की लागत निकलने की उम्मीद थी लेकिन वह भी नहीं मिली। किसान टिक्कू ने बताया कि खाद या बीज की रकम निकल आती तो दुकानदार का बकाया जमा हो जाता मगर वह भी नहीं मिला। किसानों ने बताया कि तहसील में जब चेक की जानकारी की जाती है तो बताया जाता है कि बजट मिलने पर पैसा दिया जाएगा।
तहसीलदार राजेश कुमार चौरसिया ने बताया कि तहसील में 514 गांव हैं। सूखा राहत के लिए तहसील को 6.35 करोड़ रुपये मिले थे। इस बजट से तहसील के 126 गांव के किसानों को चेक दे दिए गए। जैसे और बजट मिलेगा अन्य किसानों को चेक दे दिए जाएंगे।