मेडिकल स्टूडेंटस को मिली सौगात
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उन्नाव। प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही अति महत्वाकांक्षी 108 एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए हितकर साबित नहीं हो रही है। जिला अस्पताल से कानपुर रेफर की गई मानसिक बीमार वृद्ध महिला एंबुलेंस के इंतजार में अस्पताल परिसर में घंटाें तड़पती रही। पहले तो एंबुलेंस चालक ने कहीं और मरीज छोड़ने का बहाना किया फिर मानसिक बीमार रोगियों को न ले जाने की बात कही। सुबह 11 बजे रेफर की गई महिला को इमरजेंसी के डॉक्टर के कहने पर तीन बजे कानुपर ले जाया गया।
मांखी थाना क्षेत्र के थाना गांव निवासी रामअवतार की पत्नी शिवकली (70) कई साल से मानसिक बीमार है। हालत बिगड़ने पर सोमवार को उसके परिवारीजन जिला अस्पताल लेकर आए। बुधवार को हालत अधिक बिगड़ने पर उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया। हैलट जाने के लिए वृद्धा के बेटे अशोक ने 108 एंबुलेंस को फोन किया। फोन उठाने वाले ने बताया कि कहीं और मरीज लेकर आया हूं एक घंटे बाद पहुंचूंगा।
एंबुलेंस के इंतजार में वृद्धा के परिजन तीन बजे तक अस्पताल परिसर में खड़े रहे। एंबुलेंस के न पहुंचने पर बेटा इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे डा. तौसीफ से मिला। तौसीफ ने एंबुलेंस को फोन मिलाया तो वह बोला कि मानसिक रोगियों को कानपुर न ले जाने की बात कही। डॉक्टर के कई बार कहने पर चालक एंबुलेंस लेकर पहुंचा और वृद्धा को हैलट ले गया। डा. तौसीफ ने बताया कि वह दो बजे इमरजेंसी ड्यूटी पर आए थे। महिला मानसिक रोगी थी। एंबुलेंस चालक ने मानसिक रोगी न ले जाने की बात कहकर मरीज को कानपुर ले जाने से मना किया था।