गरीबों को कोटे की दुकानों से कम रेट पर मिल रही चीनी पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। केंद्र सरकार ने चीनी पर सब्सिडी देने से इंकार कर दिया है। जिसके बाद जिले को अप्रैल माह का कोटा नहीं मिला है। ऐसे में संभावना है कि इस माह से गरीबों को कम रेट पर कोटे की दुकानों से चीनी न मिल सके।
जिले में मार्च 2016 से खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हुआ था। इसमें 114449 अंत्योदय और लगभग चार लाख पात्र गृहस्थियों को शामिल किया गया है। इन सभी को सस्ती दर पर खाद्यान्न व चीनी का वितरण किया जाता रहा है। पात्र गृहस्थी को 900 ग्राम और अंत्योदय कार्डधारकों को 2 किलो चीनी प्रति कार्ड दी जाती है। अब अप्रैल से रियायती दर पर चीनी देने की भी व्यवस्था खत्म होने जा रही है। पूर्ति विभाग के सूत्रों की मानें तो हर माह के अंत में खाद्यान्न और चीनी अगले महीने में वितरण के आ जाती है।
जिसे ब्लाक गोदामों के माध्यम से कोटेदारों और फिर उचित दर विक्रेता के जरिए कार्डधारकों में वितरण कराया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल में वितरण के लिए मार्च माह के अंत में खाद्यान्न तो आ गया लेकिन चीनी नहीं आई। ऐसे में अब इस माह कार्डधारकों को चीनी नहीं मिल पाएगी। डीएसओ नसीम अख्तर ने बताया कि अप्रैल माह का कोटा नहीं मिला है। शासन से भी इस मामले में कोई निर्देश नहीं आए हैं।
13.50 रुपये प्रति किग्रा की दर से दी जाती है चीनी
अभी तक कोटे की दुकान से कार्डधारकों को 13.50 रुपये प्रति किग्रा के रेट पर चीनी दी जाती रही है। जानकार बताते हैं कि खुले मार्केट में चीनी 30 रुपये प्रति किलो है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी देकर गरीबों को सस्ती दर पर चीनी उपलब्ध कराई जाती थी। अब केंद्र ने सब्सिडी देने से इंकार कर दिया है और प्रदेश सरकार से चीनी पर सब्सिडी देने को कहा है। शासन अभी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले पाया है। जिससे फिलहाल इस माह चीनी का आवंटन नहीं हो पाया है।