फतेहपुर चौरासी। जवाहर नवोदय विद्यालय में चार माह पूर्व इलाज में लापरवाही से बीमार छात्रा के परिजन शुक्रवार को जब बेटी की दवा लेने स्कूल पहुंचे तो स्टाफ ने अभद्रता की। इस पर छात्र भड़क उठे। मामले के तूल पकड़ने पर प्रधानाचार्य ने सूचना पुलिस को दी। एसडीएम फोर्स के साथ स्कूल पहुंचे और मामले की जांच कराने का आश्वासन देकर हंगामा काट रहे परिजनों व छात्रों को शांत कराया।
काली मिट्टी के मोहल्ला राजीवपुरम के जवाहर नवोदय विद्यालय में पांच माह पहले कक्षा नौ की छात्रा अनन्या को बुखार आने पर स्कूल में उसे दवा दी गई थी। इससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। परिजनों ने बताया कि उसका इलाज कानपुर हैलट में चल रहा था। स्टाफ की लापरवाही पर छात्रा के पिता सुरेश सिंह ने 22 जुलाई को कालेज प्राचार्य व एएनएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मामला न्यायालय भी पहुंचा। शुक्रवार को सुरेश सिंह बेटी को लेकर कालेज पहुंचे। उनका कहना है कि कालेज में मौजूद लोगों ने उन पर सुलह का दबाव बनाया। बात न मानने पर कुछ टीचरों ने धक्कामुक्की भी की। उसके बाद वह छात्रावास पहुंचे और छात्रों को इसकी जानकारी दी। इस पर नाराज छात्रों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख प्राचार्य आरआर कसर ने सूचना पुलिस को दी। एसडीएम प्रतिपाल सिंह व थानाध्यक्ष बृजमोहन स्कूल पहुंचे और हंगामा काट रहे बच्चों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। छात्रा के पिता सुरेश सिंह ने एसडीएम को बताया कि वह शुक्रवार को बेटी की दवा लेने के लिए आए थे। उन्होंने बेटी के साथ हुई घटना की भी जानकारी देते हुए बताया 13 अप्रैल को अनन्या को बुखार आया था। उपचार की जिम्मेदारी निभा रहीं एएनएम सुशीला देवी ने बेटी को दूसरी छात्राओं के माध्यम से दवा भिजवाई थी। दवा खाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। स्टाफ ने सूचना परिजनों को दी थी। 14 अप्रैल को वह अनन्या को लेने आए थे। 17 अप्रैल को दोपहर दो बजे उसे गंभीर अवस्था में हैलेट में भर्ती कराया था।
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छात्रों ने खराब खाने की एसडीएम से शिकायत की
फतेहपुर चौरासी। जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मेस में खराब खाना व टीसी में उगाही किए जाने का आरोप लगाया। बच्चों का कहना था कि विरोध करने वालों को भविष्य खराब होने की धमकी दी जाती है। एसडीएम ने बच्चों को मामले की जांच कराए जाने का आश्वासन दिया। प्राचार्य आरआर कसर ने बताया कि अनन्या का मामला न्यायालय में है। छात्रावास में गुमराह करने पर बच्चे भड़क उठे। यह न्यायोचित नहीं है।