मीट की दुकानों में स्लाटरिंग पर रोक लगाने और बिना लाइसेंस के संचालित दुकानों पर प्रतिबंध लगाए जाने से नाराज मीट व्यापारियों ने सोमवार को मुर्गा और मछली की दुकानें बंद करके विरोध जताया। शहर व शुक्लागंज की सभी मीट और मटन की दुकानें बंद रहीं। विरोध कर रहे दुकानदारों ने चोरी छिपे मटन या मछली बेचने पर पांच हजार रुपये जुर्माना वसूलने का एलान किया, जिससे पूरी तरह बंदी रही। ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री हुई।
पशु वधशालाओं पर सरकारी आदेश के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती की और बिना लाइसेंस के संचालित मीट की दुकानों को बंद करने का नोटिस जारी कर दिया। नगर पालिका की ओर से जारी की गई नोटिस में पशु वध के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि रजिस्टर्ड स्लाटर हाउसों से मवेशी की स्लाटरिंग कराने और मांस केवल उन्हीं दुकानों पर बेचने की अनुमति होगी जिनके पास नगर पालिका से मीट बिक्री का लाइसेंस हैं।
वहीं मीट व्यापारियों का अपना तर्क है। व्यापारियों के अनुसार वह दशकों से यही काम करते रहे हैं। परिवार के पालने का यही सहारा है। नगर पालिका की ओर से उन लोगों को दुकानें बंद करने की नोटिस दी गई है। उनकी मांग है कि प्रशासन ने मटन और मछली पर तो छूट दे दी है, लेकिन बकरा और भैंसें की स्लाटरिंग और मीट बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। मीट व्यापारियों का कहना है कि जब तक प्रशासन मीट बिक्री की अनुमति नहीं देता वह मटन और मछली भी नहीं बिकने देंगे। अवैध बूचड़खानों पर सरकार के फैसले को डाक्टर सही बता रहे हैं।
डाक्टरों के अनुसार किसी पशु का काटने से पहले उसका मेडिकल होना चाहिए। पशु पूरी तरह स्वस्थ न हुआ तो उसका मीट खाकर लोग बीमार हो सकते हैं। लाइसेंसी स्लाटर हाउसों में मवेशी का पहले मेडिकल चेकअप होता है। स्वस्थ होने पर ही उसके काटने की अनुमति दी जाती है।
शुद्धता के लिए अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डीएन मिश्रा ने बताया कि जानवरों में फ्लू, पेट में कीड़े व अन्य रोग भी हो सकते हैं। किसी घायल जानवर के घाव से इंफेक्शन हो सकता है। जरूरी यह है कि जो मीट खाया जा रहा है वह पूरी तरह संक्रमण रहित है या नहीं। इसी के चलते सरकार ने असुरक्षित अवैध बूचड़खानों को प्रतिबंधित किया है।