औरास। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची गर्भवती पर वहां तैनात स्टाफ नर्स की लापरवाही भारी पड़ी। मामला बिगड़ जाने के बाद उसने डाक्टर को जानकारी दी। हालत गंभीर देख डाक्टर ने भी जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया।
क्षेत्र के गांव मीखेपुर के मजरा जबन निवासी गीता देवी (50) पत्नी बृजेश कुमार को गुरुवार को प्रसव पीड़ा हुई। हालत बिगड़ने पर बृजेश पत्नी को लेकर रात नौ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। उनके साथ आशा बहू सुमन देवी भी थीं। उस समय स्वास्थ्य केंद्र में संविदा पर तैनात डॉ. रश्मि, डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव के अलावा स्टाफ नर्स शिल्पा देवी की ड्यूटी थी। रात नौ बजे जब गीता देवी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं तो वहां सिर्फ स्टाफ नर्स ही मौजूद थी।
बाकी डॉ. अपने कमरों में आराम कर रहे थे। गीता देवी की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई, लेकिन स्टाफ नर्स ने न तो उसे सही सलाह दी और न ही डॉक्टरों को इसकी जानकारी। देर रात लगभग दो बजे जब गीता की हालत गंभीर हो गई तो डॉ. रश्मि को बुलाया। उन्होंने गीता को देखा और जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल की दूरी अधिक होने से पति बृजेश, गीता को लेकर संडीला जा रहा था कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। पति ने डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत सीएमओ से करने की बात कही है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
इस स्वास्थ्य केंद्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी तीन मई को थानाक्षेत्र के बड़ादेव में रहने वाली सुशीला (28) पत्नी कालीचरन को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। सुशीला को सही सलाह न दिए जाने से प्रसव के बाद उसका केस बिगड़ गया था और डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया था। रास्ते में उसकी मौत हो गई थी।
क्या बोले जिम्मेदार
डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि ड्यूटी पर मैं जरूर था लेकिन मुझे इस केस की जानकारी ही नहीं दी गई। इसलिए मैं कुछ बता भी नहीं सकता।
संविदा पर तैनात डॉ. रश्मि ने बताया कि स्टाफ नर्स ने काफी देर बाद जानकारी दी। इस कारण केस बिगड़ गया।
स्टाफ नर्स शिल्पा के अनुसार लेवर पेन हुआ था। मैं देख रही थी। हालत बिगड़ने पर डॉ. रश्मि को जानकारी दे दी थी।