यह सुवचन सतपाल जी महाराज ने भक्तों के बीच व्यक्त किए। वह शनिवार को शहर स्थित गदनखेड़ा में मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित हो रहे सद्भावना सम्मेलन में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे है। उन्होंने कहा कि आज हम अध्यात्मज्ञान को भूल चुके हैं।
सभी को अपने हृदय के भीतर अध्यात्म को जागृत करना होगा। जब हमारे भीतर अध्यात्म जागृत होगा तब भारत सर्वोपरि बनेगा। उन्होंने मौजूद सभी भक्तों को सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे भवंतु निरामया का संदेश दिया।
कहा कि वर्तमान में हमारे देश में भौतिक शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। अनेक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भी तेजी से खुलते जा रहे हैं। इसके बावजूद देश में स्वामी विवेकानंद, शिवाजी, महाराणा प्रताप व रानी लक्ष्मीबाई जैसी विभूतियां पैदा नहीं हो पा रही हैं।
उन्होंने इसका मुख्य कारण है कि सभी ने ऋषि-मुनियों की शिक्षा आध्यात्मवाद को भुला दिया है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए माता अमृता जी ने कहा कि भक्त जब गुरु दरबार में जाता है तो वह नि:स्वार्थ भाव से सेवा करता है। विभुजी ने कहा कि भगवान का नाम ही जीवन का आधार है। वह सभी प्रभावों से परे है। सम्मेलन में नगर के अनेक प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों व उत्तर प्रदेश, बिहार व दिल्ली आदि प्रदेशों के भी श्रद्धालुओं ने महाराज के कल्याणकारी प्रवचनों का श्रवण किया। सम्मेलन का संचालन महात्मा हरिसंतोषानंद ने किया। इस मौके पर विधायक पंकज गुप्ता, पालिकाध्यक्ष रामचंद्र गुप्ता, पप्पू अवस्थी, रामकुमार पांडेय, इंद्रजीत, रामशंकर सिंह भदौरिया भी मौजूद रहे।