उन्नाव। अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का मुकाबला करने के लिए दूसरे देशों में निर्यात बढ़ाएंगे। बुधवार को तीन देशों में तैनात, भारतीय राजदूतों ने दही औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया। यहां सैडलरी (घोड़े की काठी), जूता व अन्य उत्पादों की खासियत और गुणवत्ता जानी। उन्होंने बताया कि वह विदेशों में वहां के उद्यमियों और बड़े व्यापारियों को भारतीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करेंगे।
देश का चमड़ा उद्योग हर साल 10,000 करोड़ के चर्म उत्पाद का निर्यात अमेरिका (संयुक्त राज्य अमेरिका) को करता रहा है। इसमें उन्नाव और कानपुर परिक्षेत्र का योगदान औसतन 2500 करोड़ का है। जिले के औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी और बंथर में टेनरियां व चर्म उत्पादक इकाईयां हैं। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इस से चर्म निर्यातकों ने रूस, यूके, दुबई, जापान व अन्य यूरोपीय देशों में नए खरीदारों की तलाश शुरू की है।
केंद्र सरकार भी निर्यात करने वाले उद्यमियों की हर संभव मदद के लिए आगे आई है। भारत सरकार ने विदेशों में तैनात भारतीय राजदूतों की मदद से उत्पाद और उनकी गुणवत्ता की जानकारी करके दूसरे देशों में व्यापार की संभावनाएं तलाशने में लगाया है। बुधवार को लंदन में तैनात डिप्टी हाई कमिश्नर सुजीत कुमार, आबिदजान में तैनात राजदूत राजेश रंजन, स्लोवाकिया में तैनात भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव व अन्य अधिकारियों ने चर्म उत्पाद बनाने वाली दही चौकी स्थित किंग्स इंटरनेशनल और इसके बाद जूता बनाने वाली सुपर हाउस फैक्टरी का निरीक्षण किया।
किंग्स इंटरनेशनल के निर्देशक व उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ के उन्नाव चेप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम ने फैक्टरी में बनने वाली घोड़े की काठी, पर्स आदि उत्पादों की जानकारी ली। टेनरी में तैयार होने वाले चमड़े के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद राजदूत दल ने सुपर हाउस फैक्टरी का दौरा किया और जूतों के बारे में जानकारी ली।
जीएम डीआईसी करुणा राय ने बताया कि भारतीय राजदूतों का एक दल लखनऊ के दौरे पर आया था। इसके बाद यहां के उद्योंगों में जाकर उत्पादों की जानकारी ली। बताया कि यह राजदूत उन देशों में भारतीय उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं तलाशेगा।