पखवारे भर पूर्व उन्नाव जंक्शन से मात्र दो किमी. की दूरी पर कानपुर की ओर डाउन लाइन के निरीक्षण में विभागीय अधिकारियों ने जर्जर पटरी को ट्रेनों के संचालन के लिए खतरनाक बताते हुए चिह्नित स्थान पर रेडक्रास का साइन लगा दिया था। यहां पर पटरी ट्रेन के पहियों में रगड़कर छिल गई है और काफी दूरी तक गड्ढे हो गए हैं। जानकारों की मानें तो ऐसे स्थान पर ट्रेन का लोड पड़ने से अक्सर पटरी में फ्रैक्चर हो जाता है और यह हादसे का सबब बनता है। पटरी में रेडक्रास लगा होने की जानकारी पर स्थानीय कर्मचारियों ने इस स्थान पर जुगाड़ का सपोर्ट लगा दिया। आलाधिकारियों के चेताने के बाद भी स्थानीय अधिकारी इसे गंभीरता से न लेकर जुगाड़ से ट्रेनें चला रहे हैं। अधिकारियों ने ऐसा तब किया है जब इसी ट्रैक पर एक सैकड़ा से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इसी ट्रैक पर गंगाघाट में मालगाड़ी डिरेल हो चुकी है। व्यस्त ट्रैक पर दर्जनों पैसेंजर, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट ट्रेनें दौड़ रही हैं। जिनमें शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेन भी शामिल है।
अधिकारी ही बरते रहे लापरवाही
रेल हादसों में हुए जान-माल के नुकसान को संज्ञान में लेते हुए एक ओर जहां विभाग हादसों से बचाव के तरीके ढूंढ रहा है और तरह-तरह के उपकरण अफसरों को उपलब्ध कराने के प्रयास में लगा हुआ है। वहीं दूसरी ओर विभाग की इस मंशा पर विभागीय अफसर ही बट्टा लगाते नजर आ रहे हैं। सीनियर सेक्शन इंजीनियर मो. इरशाद ने ऐसी किसी भी जानकारी से इनकार किया।