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Unnao News: गबन में दो डीएमएम व 11 बीएमएम की सेवा समाप्त

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उन्नाव। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना में तीन साल पहले हुए 3.85 करोड़ रुपये के गबन में दो जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) और 11 ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) की सेवा समाप्त कर दी गई है। 12 क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ) के पदाधिकारियों को 89.24 लाख रुपये के अनियमित भुगतान का दोषी मानते हुए उनसे वसूली के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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यह गबन वित्तीय वर्ष 2023-24 में गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और प्रशिक्षण देने की योजना से जुड़ा है। शासन ने 3558 समूहों के लिए 3.85 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें प्रति समूह 10,000 रुपये निर्धारित थे। तत्कालीन एनआरएलएम प्रभारी संजय पांडेय और जिला मिशन प्रबंधक शिखा मिश्रा ने महिला समूहों को पैसा नहीं दिया। उन्होंने कानपुर देहात, चित्रकूट और उन्नाव के निजी वेंडरों की फर्मों के खातों में बजट भेजकर सरकारी धन का गबन किया। तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश मीणा की ओर से कराई गई जांच में इसकी पुष्टि हुई थी। इसके बाद कोतवाली में संजय पांडेय और शिखा मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शासन ने 24 जुलाई को संजय पांडेय को निलंबित कर दिया था, जिनका पहले पदोन्नति होकर स्थानांतरण हो गया था। अब इस मामले में डीएमएम शिखा मिश्रा और प्रदीप कुमार सहित 11 बीएमएम की सेवा समाप्त की गई है। इन बीएमएम में मनजीत सिंह सोढ़ी, प्राणवीर सिंह, सोनम सिंह चंदेल, रितिका करमाकर, आलोक प्रताप, सबीना बानो, अंकुर श्रीवास्तव, हुमैरा खातून, अरविंद सोनी, संजय यादव और रामदयाल शामिल हैं। एक अन्य बीएमएम रामकिशोर की पहले ही मौत हो चुकी है।

जांच टीम ने 12 सीएलएफ पदाधिकारियों को 89.24 लाख रुपये के अनियमित भुगतान का दोषी पाया है। यह भुगतान कुल 3.85 करोड़ रुपये के गबन का हिस्सा था, जिसे वेंडरों के खातों में भेजा गया था। एनआरएलएम की संयुक्त मिशन निदेशक सुधा शुक्ला ने उपायुक्त को पत्र भेजा है। उन्होंने सभी दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उनसे अनियमित भुगतान की वसूली सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
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