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सई नदी की सफाई में जुटे, बारातशाला भी बनवा दी

Tue, 23 Feb 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला, उन्नाव
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‘कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’ कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां जिले के हसनगंज के मोहान कस्बा और बेथर गांव के लोगों पर सटीक बैठ रही हैं। सरकारी मशीनरी से नाउम्मीद यहां के बाशिंदे व्यवस्था को कोसने के बजाए खुद ही समस्याएं सुलझा रहे हैं। लोगों ने फावड़ा उठाया और इलाके की लाइफ लाइन कही जाने वाली सई नदी की सफाई करने में जुट गए। लोगों का जज्बा देख मोहान नगर पंचायत अध्यक्ष भी साथ हो लिए। हिंदू ही नहीं कई मुस्लिम भी इस नेक काम में साथ दे रहे हैं। वहीं, बेथर गांव के लोगों ने गरीबों की बेटियों की शादी के लिए सात लाख रुपये जुटाकर बारातशाला बनवा दी।
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अस्तित्व खो रही सई नदी को पुनर्जीवित करने की मांग अरसे से उठ रही थी। कहीं से कोई सुनवाई न होने पर यहां के लोगों ने कमर कसी और श्रमदान कर नदी की सफाई में जुट गए। इनके हौसले देख मोहान नगर पंचायत अध्यक्ष समरजीत यादव भी साथ हो लिए। जेसीबी व अन्य खर्चे राज्य वित्त से कराने की हामी भरी। इस समय मोहान नगर पंचायत की मदद से कस्बे के लोग श्रमदान कर नदी साफ करने में जुटे हैं। नदी के पानी को भी साफ करने काम तेजी से चल रहा है। नाले का पानी नदी को गंदा न करे, इसके लिए गहरे गड्ढे  खोदे जा रहे हैं। नालों के मुहानों पर जाली लगवाई जा रही है। नगर पंचायत के ईओ मुकेश निगम ने बताया कि आने वाले दिनों में बजट की व्यवस्था कर नालों का रुख भी मोड़ दिया जाएगा या फिर सीवेज प्लांट लगाकर पानी को साफ करने के बाद ही नदी में छोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 45 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। कस्बे के मकदूम अली, पप्पू, शैलेंद्र, अजय, महेश, संतराम, बड़क्के आदि तमाम लोग नदी साफ करने में श्रमदान कर रहे हैं।
देखा न गया गरीबों का दर्द, दी राहत’
उन्नाव। मौसम खराब होने पर गरीब की बेटियों के ब्याह व अन्य मांगलिक कार्यों में जगह की दिक्कत को देखते हुए समाजसेवी कमल किशोर तिवारी और भगौती प्रसाद विमल ने बेथर गांव के हटिया टोला में सात लाख रुपये खर्च कर बारातशाला बनवाई है। पूर्व प्रधान सिद्धार्थ तिवारी ने ग्राम पंचायत से जमीन की व्यवस्था कराई। कमल किशोर तिवारी बताते हैं कि गरीब लोग बेटी की शादी के लिए खेतों और सड़कों पर टेंट लगवाते थे। कभी मौसम खराब होने पर इनका काफी नुकसान हो जाता था। इसे देखते हुए इस नेक काम में सहयोग दिया।
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