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बिटिया के हाथ पीले करने में आरटीजीएस बना सहारा

Mon, 28 Nov 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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पिता-पुत्री - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मालूम हो कि सदर तहसील के परियर गांव के रहने वाले राजू ने अपनी लाडली रंजीता (21) की शादी के लिए बड़ी मेहनत से लाखों की रकम जुटाई थी। पैसा बैंक खाते में जमा था। बेटी की शादी 28 नवंबर को तय हुई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लाडली के हाथ पीले करने की तैयारियां भी शुरु हो गई। इस बीच प्रधानमंत्री के एक फैसले से बिटिया की शादी बीच मझदार में गोते लगाती नजर आने लगी। बाद में नियमों में कुछ छूट भी दी गई लेकिन फिर कैश की किल्लत से मुश्किलें बढ़ गई थीं। 21 नवंबर को होने वाले तिलक की खरीदारी को ढाई लाख की नगदी खाते से निकलवाने को राजू ने बेटी सहित बैंक के कई दिन चक्कर लगाए फिर भी बात नहीं बनी। हारकर पिता ने बेटी के लिए बनवाए गए जेवरों को ही गिरवी रख दिया और किसी तरह से तिलक निपटाया। इसके बाद 28 नवंबर यानि आज आने वाली बारात को लेकर चिंता सताने लगी। बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे यह सोचकर पिता का दिन रात का सुकून गायब था। चिंता में डूबे पिता का सहारा अंत में आनलाइन बैंकिंग सिस्टम बना। सफीपुर पंजाब नेशनल बैंक ने शुक्रवार को कैश की किल्लत के बीच जमाकर्ता को दस हजार की नगदी देने के साथ ही आरटीजीएस से सभी का भुगतान करने की सलाह दी। कई तरह की चिंताओं से घिरे पिता ने किराना दुकानदार, बर्तन दुकानदार व हलवाई से सीधे खाते में आरटीजीएस से भुगतान की बात कही तो वह लोग तैयार हो गए। दुकानदारों ने हामी भरी तो पिता की उम्मीद को पंख लग गए। आरटीजीएस के साथ ही कुछ अपनों ने उधार देकर राजू को हौसला दिया। इस तरह सोमवार को होने वाली शादी की तैयारियां पूरी कर राजू की खुशी का ठिकाना नहीं है।
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डीएम की पैरवी भी सख्त नियमों के आगे साबित हुई थी बौनी  
तिलक में नगदी दिलाने के लिए पिता ने डीएम से गुहार लगाई। जिस पर जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बैंक मैनेजर को पत्र लिख मदद करने को कहा लेकिन निकासी के सख्त नियमों ने डीएम की पैरवी भी काम नहीं आई। नियमों की दुहाई देकर मैनेजर ने भी हाथ खींच लिए थे। जिससे शादी कैंसिल होने की कगार पर पहुंच गई। अरमानों के साथ ही इज्जत दांव पर लगती देख पिता ने लाडली के जेवर गिरवी रख जैसे-तैसे तिलक की रस्म पूरी की थी।
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