हरदोई। मनरेगा की जगह लेने वाली वीबीजी रामजी का इसी वित्तीय वर्ष से संचालन होना है। वैसे तो 20 अप्रैल की तारीख तय मानी जा रही थी लेकिन मनरेगा में मजदूरी और सामग्री मद में एक अरब से अधिक रुपये की बकायेदारी की अदायगी से वीबीजी रामजी के संचालन में समय लग सकता है।
गांवों में विकास, निर्माण के साथ ही जॉब कार्डधारकों को रोजगार दिए जाने के लिए संचालित मनरेगा के स्थान पर भारत सरकार ने वीबीजी रामजी दिया है। इसका संचालन इसी वित्तीय वर्ष से होना है। प्रारंभिक तौर पर इसे 20 अप्रैल से संचालित किए जाने की तैयारी की गई लेकिन मनरेगा मद में मजूदरी, राजमिस्त्री का मेहनताना और सामग्री आपूर्ति करने वाली फर्मों की बकायेदारी से वीबीजी रामजी के संचालन में कुछ माह का समय लगने की संभावना है। इससे मनरेगा मद में काम करा रहे प्रधान-पंचायत सचिवों को राहत है।
मनरेगा में काम कराने के बाद मजदूरी और सामग्री आपूर्ति के भुगतान के लिए बिल-वाउचर ऑनलाइन फीड किए जाने की व्यवस्था है। ई-मस्टर रोल फीड किए जाने के साथ ही भुगतान के लिए फंड ट्रांसफर ऑर्डर अपलोड किए जाते हैं। इसी आधार पर नोडल खाते से संबंधित के खातों में आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम से भुगतान होता है। वहीं, वीबीजी रामजी के संचालन में समय लगने से मनरेगा मद में कराए जा रहे कामों को भी पूरा कराने के लिए समय मिल गया है।
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मनरेगा में बकायेदारी पर एक नजर :
. 1,57,31,000 रुपये : श्रमिकों की मजदूरी
. 1,45,93,000 रुपये : राजमिस्त्री व अर्द्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी
. 89,19,19,000 रुपये : सामग्री आपूर्ति
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मनरेगा में बकायेदारी की जानकारी शासन को भी है। मजदूरी, राजमिस्त्री और सामग्री मद में भुगतान बकाया है। रुपये आवंटित होते ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी। हां, मनरेगा की बकायेदारी और चल रहे कामों के कारण अभी वीबीजी रामजी के संचालन में कुछ समय लगने की अधिकारियों ने संभावना जताई है। वहीं सभी कार्यक्रम अधिकारियों से कहा गया कि चल रहे कामों को समय से पूरा करा लें ताकि रुपये आते ही भुगतान भी दिलाया जा सके। -रवि प्रकाश सिंह, उपायुक्त, श्रम रोजगार