धनुष यज्ञ में दिखाया गया कि ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान राम व लक्ष्मण राजा जनक के दरबार में पहुंचते हैं। राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। उन्होंने एक शर्त रखी थी कि जो भी वीर शिवजी धनुष तोड़ेगा उसके साथ ही सीता का विवाह होगा। दरबार में एक से एक शूरवीर आते हैं, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं पाता है। यह देख जनक विलाप करते हुए कहते हैं ‘तजहु आस निज-निज गृह जाऊ, लिखा न विधि वैदेही विवाहू’। ऋषि विश्वामित्र का आदेश पाकर भगवान राम के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते वह टूट जाता है। इसके बाद सीता का विवाह राम के साथ हो जाता है। शिव धनुष टूटने की जानकारी होने पर भगवान परशुराम पहुंचते हैं जहां उनका लक्ष्मण से वार्तालाप होता है। राम की भूमिका में हमीरपुर के अवनीश पांडेय व लक्ष्मण की भूमिका में प्रदीप पांडेय ने सुंदर संवादों का प्रदर्शन किया। शशिभूषण त्रिपाठी ने वाणासुर व मयंक ने जनक का रोल किया। विश्वामित्र का अभिनय तेज नारायण शुक्ला कानपुर, रावण सत्य प्रकाश त्रिपाठी, परशुराम का अभिनय रमन शुक्ला ने किया। कार्यक्रम आयोजक योगेंद्र प्रताप सिंह ने धनुषयज्ञ लीला का मंचन करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया। व्यास की भूमिका विनोद दीक्षित ने निभाई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वक्षराज सिंह, प्रदीप शुक्ला, पूर्व प्रधान राजकिशोर सिंह, सुनील सिंह, राजू पंडित, पूती पंडित, गुड्डू सिंह, देवराज सिंह, सत्रुघभन सिंह, मुन्ना सिंह आदि रहे।