जगद्गुरु रामभद्राचार्य अमर उजाला से खास बातचीत में राम मंदिर निर्माण व गंगापुत्र के मुद्दे पर खुलकर बोले। उन्होंने राम मंदिर निर्माण पर केंद्र सरकार से निराशा हाथ लगने और बेहतर विकल्प न होने की बात कही। वह सरकार से दुखी दिखे। रामभद्राचार्य विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शन मंडल में वरिष्ठ सदस्य हैं। वह कहते हैं कि अपने हैं तो मार-डांट कर कुछ करा भी सकते हैं। दूसरे से क्या उम्मीद करेंगे।
पांच अक्तूबर को दिल्ली में हुए संत सम्मेलन में बनी आम राय पर रामभद्राचार्य ने बताया कि सम्मेलन में सरकार से साफ कह दिया गया है कि राममंदिर निर्माण होना चाहिए। नवंबर माह में दिल्ली में होने वाले धर्मादेश सम्मेलन में साधु-संत मंदिर के लिए कार सेवा का निर्णय लेंगे या सरकार पर छोड़ देंगे, इस पर उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी से कुछ कहना ठीक नहीं है। यह समय बताएगा। गंगापुत्र सदानंद के गोलोकवास पर भाजपा व सरकार के रुख पर रामभद्राचार्य ने बताया कि वह बहुत दुखी हैं।
वर्तमान सरकार के संदर्भ में कहा, मेरा स्वभाव है कि मैं कभी झूठ नहीं बोलता। इसी से मुझे बहुत बलिदान देना पड़ा। देता भी हूं। समस्या इस बात की है कि सरकार का रुख बहुत अच्छा नहीं है। मुझे कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा। ये लोग अपने हैं। इन्हें डांट डपटकर कुछ करवा सकते हैं। हमको लगता है कि हम करवाएंगे। यदि अन्य लोग आए तो उनको कुछ कहा ही नहीं जा सकता। भगवान करे ऐसा न हो। अपने लड़के को दो-चार थप्पड़ लगाए जा सकते हैं लेकिन दूसरे के बेटे को थप्पड़ लगाया तो उल्टा हो सकता है।