पाटन। आजादी के पहले स्वतंत्रता आंदोलन 1857 के नायकों में डौंडियाखेड़ा के शासक राजा राव राम बक्स सिंह का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। अंग्रेजों के नाम से नफरत करने वाले राव साहब ने मंदिर में 12 गोरों को जिंदा जला दिया था। इससे वह चर्चा में आ गए और फिर अंग्रेजों ने उन्हें 28 दिसंबर 1861 में फांसी दे दी थी।
बक्सर क्षेत्र अंतर्गत डौंडियाखेड़ा के राजा राव राम बक्स सिंह को अंग्रेजों के नाम से ही नफरत थी। उनके क्षेत्र में घुसने की अंग्रेज हिम्मत तक नहीं कर पाते थे। वर्ष 1857 को कानपुर में घुसी एक अंग्रेजी सेना की टुकड़ी को नाना साहब की सेना ने गंगा किनारे से खदेड़ दिया था। नाना साहब की सेना से भागकर यह टुकड़ी उन्नाव की सीमा में पहुंच गई, जहां उसका पीछा राजा राव राम बक्स सिंह ने किया। इससे भागकर अंग्रेज बक्सर के शिव मंदिर में छिप गए थे। काफी प्रयासों के बाद भी जब अंग्रेज मंदिर से नहीं निकले तो राव साहब ने उन सभी को मंदिर में ही जिंदा जला दिया था।
इस बात से क्रोधित अंग्रेजों ने उनके एक शिष्य को अपनी ओर मिला लिया और उससे मिली जानकारी से राजा साहब को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 28 दिसंबर 1861 को उसी शिवमंदिर के पास लगे बरगद के पेड़ पर खुली जगह में फांसी दे दी थी। फांसी देने के दौरान दो बार रस्सी टूटी थी। राव साहब की कोई भी निशानी अंग्रेज छोड़ना नहीं चाहते थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने फांसी देने के बाद डौंडियाखेड़ा स्थित राव साहब के किले को गिरवाना शुरू कर दिया था। मजदूर जब किले की दीवार नहीं गिरा पाए तो अंग्रेजों ने तोप के गोले दागकर दीवार को गिरा दिया था। इसके बाद से ही डौंडियाखेड़ा वीरान हो गया। राजा साहब मां चंद्रिका देवी के भक्त थे।
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सोने की तलाश में हुई खुदाई से चर्चा में आया था डौंडियाखेड़ा
15 अक्तूबर 2013 को दिवंगत संत शोभन सरकार की ओर से राव साहब के किले में एक हजार टन सोना दबा होने की घोषणा की थी। इसके बाद डौंडियाखेड़ा सुर्खियों में आ गया था। देश ही नहीं विदेश तक में डौंडियाखेड़ा चर्चा में हो गया था। हालांकि महीनों की खुदाई के बाद भी किले में कुछ नहीं निकला था। आज देश के इस सपूत का 166वां बलिदान दिवस मनाया जाएगा।
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महाराष्ट्र में हुआ शहीद राव राम बक्स सिंह चौक का निर्माण
उन्नाव। महाराष्ट्र के जिला ठाणे में भिवंडी महानगर पालिका ने अशोकनगर प्रवेशद्वार पर डौंडियाखेड़ा के राजा के नाम से शहीद राव राम बक्स सिंह चौक का निर्माण कराया है।
बीघापुर तहसील के बारा निवासी विनोद चंद्रनाथ त्रिपाठी 20 से 22 साल पहले मुंबई के ठाणे में जाकर बस गए थे। विनोद वहां पर ठेकेदारी करते हैं। विनोद के मुताबिक, उनके पूर्वज पं. भलभद्रराम राव साहब के रियासत में जमींदार थे। साथ ही उनके करीबी सहयोगी थे। राव साहब के साथ उनके पूर्वजों ने भी देशहित के लिए कुर्बानी दी थी। विनोद ने ही राव साहब के लिए चौक बनाने का प्रयास शुरू किया था। चार अगस्त 2012 को भिवंडी महानगर पालिका महासभा के सदन में अमर शहीद राव राम बक्स सिंह चौक निर्माण का प्रस्ताव हुआ था। आज वहां पर चौक बनकर तैयार हो गया है। जल्द ही इसका लोकार्पण होना है। (संवाद)