उन्नाव। कोहरे की मार झेल रही फसलों को गुरुवार को दोपहर से शुरू हुई बूंदाबांदी से राहत मिलने की जगी उम्मीद शाम होते-होते टूटती नजर आई। बारिश में जैसे-जैसे तेजी आई वैसे-वैसे अन्नदाताओं के दिलों की धड़कन बढ़ती गई। पिछले साल जनवरी 2014 का नजारा भी आंखों के सामने छाने लगा।
जब बारिश व ओले गिरने से सरसो, अरहर, गेहूं, चना, मटर, टमाटर व आलू की फसले चौपट हो गई थीं। इस बार भी जिस तरह मौसम करवट ले रहा है उसे देखते हुए इतनी ज्यादा बारिश के आसार तो नहीं हैं, लेकिन अगर दो-तीन दिनों तक बारिश हुई तो कई फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उधर, आसमान पर दिन भर बादल छाए रहने से सूर्य देव के दर्शन नहीं हो सके। बारिश के साथ चली दक्षिणी-पूर्वी हवा ने गलन में और इजाफा कर दिया। हालांकि तापमान बुधवार के मुकाबले ज्यादा दर्ज किया गया है।
बीते करीब एक पखवारे से गिर रहे कोहरे ने फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। सरसों, चना, मटर, अरहर जैसी फसलों के फूल झड़ने भी लगे थे। आलू पर झुलसा रोग लगने की आशंका के चलते शासन ने उद्यान विभाग को दिशा निर्देश तक जारी कर दिए।
नए साल के पहले दिन जैसे ही बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ किसानों के चेहरे पर कोहरे के कारण छायी चिंता कुछ हद तक कम होती दिखी। बूंदाबांदी के बाद कोहरे से फसलों को राहत मिली है। शाम होते-होते अन्नदाताओं के चेहरों पर फिर से चिंता की लकीर दिखने लगीं। बूंदाबांदी के बाद शाम को बारिश कुछ तेज हुई तो फसलों के खराब होने की चिंता फिर बढ़ गई।
मौसम वैज्ञानिक सीबी सिंह ने बताया कि बूंदाबांदी तो फसलों के लिए फायदेमंद है, लेकिन अगर बारिश तेज हुई तो फसलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। बारिश की वजह से सरसों, अरहर, चना व मटर के फूल गिर सकते हैं। जिससे पैदावार प्रभावित होगी।