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किसानों पर बारिश व ओलों के रूप में बरसी आफत

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शुक्रवार रात हुई बारिश के बीच गुजरते वाहन। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। शुक्रवार शाम को आसमान से बारिश व ओलों के रूप में आफत बरसी। प्रकृति की मार से किसानों को तगड़ा नुकसान हुआ है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश व ओलावृष्टि से सरसों, आलू के साथ गेहूं की फसल खेत में ही गिर गई। वहीं, शहर से लेकर गांव तक की बिजली उड़ गई। जगह-जगह जलभराव से राहगीर परेशान हुए। मौसम विभाग ने अभी 11 मार्च तक ऐसा ही मौसम रहने की संभावना जताई है।
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सदर तहसील के स्मार्ट ग्राम मरौंदा मझवारा में निर्माणाधीन मंदिर पर बिजली गिरी। गांव के उमेश यादव के यहां एक विशाल शिवालय का निर्माण चल रहा है। शुक्रवार सुबह हल्की बूंदाबांदी के साथ बिजली चमकी और नवनिर्मित मंदिर के बाहर बनी विष्णुजी की मूर्ति पर जा गिरी। जिससे मूर्ति का सिर क्षतिग्रस्त होकर कुछ दूर पर जा गिरा। मूर्ति के कुछ अवशेष दो सौ मीटर दूर जा गिरे। इसके अलावा भदेवना से परियर रास्ते पर गांव के समीप नीम के पेड़ पर बिजली गिरी। जिससे उसकी डालें टूट गईं। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। फतेहपुर चौरासी संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। शुक्रवार शाम 6 बजे के करीब क्षेत्र में भीषण ओलावृष्टि हुई। इससे सरसों, गेहूं, आलू आदि फ सलों को काफ ी नुकसान हुआ है। कृष्ण प्रकाश मिश्र, बबलू मिश्रा, आनंद कुमार यादव, रमा तिवारी, शांती मोहन तिवारी, राजीव शुक्ला व वरुण आदि किसानों ने बताया कि इतने बड़े ओले कभी नहीं गिरे। प्रकृति के इस प्रकोप से किसानों को बहुत नुकसान हुआ है।
सफीपुर क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फ सल तबाह होने के अलावा आम के बाग में आ चुके बौर को भी भारी नुकसान हुआ है। किसान बच्चन कुशवाहा, विजय व रामभजन के मुताबिक, तेज हवाओं से फसलें खेत में ही पलट गई हैं। आम के पेड़ों में आया बौर नीचे आ गया। कस्बे से लेकर दरौली, मऊमंसूरपुर व पापरि आदि गांवों में भी ओलावृष्टि हुई।
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गंजमुरादाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं की फ सल गिर गई है। आलू की फ सल सड़ने की कगार पर पहुंच गई। यही नहीं आम का बौर भी गिर गया है। भारी नुकसान के चलते किसानों व बागवानों के चेहरे मुरझा गए हैं।
बांगरमऊ संवाददाता के अनुसार, बेमौसम बरसात तथा ओलावृष्टि से एक बार ठंड भी जहां पुन: लौट आई वहीं, किसानों को भारी नुकसान हुआ है। शुक्रवार सुबह आसमान साफ था। शाम होते ही अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ छोटे आकार के ओले भी गिरे और तेज हवा चलने लगी। बारिश से गेहूं की फ सल को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकांश खेतों में हवा के तेज झोंके से गेहूं व लाही की फसल जमीन पर गिर गई। दूसरी ओर आम के बागों में आए बौर को भी तेज हवा के झोंके व ओलों से भारी क्षति हुई है। इस वर्षा से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें दिखाई पड़ने लगी है।
वहीं रसूलाबाद, कुरसठ, मिर्जापुर कला, मियागंज, मवई ब्रम्हनान, हैदराबाद, बारीथाना, आसीवन, बरहाकला, ताजपुर, अरेरकला, रऊकरना, तालिबसराय, किन्ना, परेंदा, नयाखेड़ा, डीहा, कलंदरखेड़ा, अजमतनगर व कूरेमऊ सहित नवाबगंज ब्लॉक के सधीरा, दिलवल, नानाटीकुर, सिंदुरिया, पिपरोसा, रायपुर गढ़ी, भदेमू आदि गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि से फ सलों को नुकसान पहुंचा है। पुरवा के टीकरकला में एक बड़े आकार के ओले गिरे। सलेथू, जगतखेड़ा, पकराबुजुर्ग, पनहन, हुलासीखेड़ा, कटहर, बेहटा भवानी, त्रिपुरारीपुर, मुरेता, मनशाखेड़ा, रामाखेड़ा में भी ओलावृष्टि से फसलें तबाह हुई हैं। किसान संजय तिवारी, शिवदयाल, विनोद कुमार ने बर्बाद फसलों का मुआवजा दिलाने की मांग एसडीएम से की है। वहीं मौरावां कस्बे में भी ओले गिरे। नवाबगंज में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर तेज हवाओं के समय पेड़ सड़क पर आ गिरा। जिससे आवागमन ठप हो गया। वन व पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर पेड़ हटवाने की कवायद शुरू की। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया गया।
उपकृषि निदेशक डा. नंदकिशोर ने बताया कि 7.8 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। अभी 7 व 11 मार्च तक हल्के बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश की भी संभावना है। हवा के सामान्य से तेज गति से चलने का अनुमान है। बताया कि शुक्रवार को सफीपुर क्षेत्र में ओलावृष्टि की जानकारी मिली है। शनिवार को बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को गांवों में भेजकर नुकसान का आकलन कराया जाएगा। यदि फसलों की क्षति मिलती है तो किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विकास शुक्ला ने बताया कि आम की फ सल में इस समय बौर आ गया है। उद्यान विभाग ने बेहतर पैदावार की उम्मीद जगाई है। इधर हो रही बारिश से मौसम में नमी बढ़ गई है। ऐसे में आम में दीमक, जाला कीट व गुठली का घुन लगने की आशंका बढ़ गई है। गुठली का घुन गुठली में छेदकर उसका रस चूस लेता है। जाला कीट पत्तियों को नष्ट करता है। इसके लिए एजाडीरेक्टिन 3000 पीपीएम 2 एमएल प्रतिलीटर तथा क्यूनालफ ास 2 से 3 एमएल प्रति लीटर की दर से छिड़काव किया जाए। जनपद में 32 हजार हेक्टेयर में आम फल क्षेत्र है।
शुक्रवार शाम को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश व ओलावृष्टि से शहर और गांवों की बिजली बाधित हो गई। पूरे शहर में घंटों तक बिजली संकट रहा। 33 हजार लाइन के ब्रेकडाउन में चले जाने से कब्बाखेड़ा, सिटी पावर हाउस, इब्राहिमाबाग, पीडीनगर आदि उपकेंद्रों से जुड़े गांधीनगर, सिविल लाइन, इंद्रानगर, पीडीनगर, जवाहरनगर, रामपुरी, मौहारीबाग, मोतीनगर, बाबूगंज में बिजली संकट रहा। बिजली न आने से लोग परेशान रहे। शहर के अलावा नवाबगंज, हसनगंज, पुरवा, असोहा, बीघापुर, सफीपुर, बांगरमऊ, औरास आदि ग्रामीण इलाकों में भी घंटों बिजली गुल रही। वहीं, इस बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव हो गया। मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक में पानी भर जाने से लोगों को बीच से होकर गुजरना पड़ा।
फतेहपुर चौरासी के थाना क्षेत्र के सुब्बाखेड़ा गांव निवासी शिवशंकर(35) पुत्र गिरधारी गांव के बाहर बाग में झोपड़ी बनाकर अकेले रह रहा था। शुक्रवार को तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ टूटकर झोपड़ी पर गिर गया। हादसे में झोपड़ी में मौजूद शिवशंकर की मौत हो गई। गांव में रहने वाले मृतक के बड़े भाई राकेश व छोटे भाई महेश ने बताया कि तीन साल पहले शिवशंकर की शादी हुई थी। चौथी विदा होने के बाद से पत्नी नहीं आई। जिससे वह तनाव में रहता था और गांव के बाहर खेत में झोपड़ी बनाकर रह रहा था। मजदूरी कर वह अपना पेट पालता था। भाइयों ने पुलिस को सूचना दी है।
जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि ओलावृष्टि व जलभराव से फसलों को हुए नुकसान की जानकारी किसान 72 घंटे के अंदर टोलफ्री नंबर 1800120909090 पर दे सकते हैं। इसके अलावा कृषि, राजस्व विभाग के अधिकारी, ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के माध्यम से भी किसान मुआवजे का दावा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसान संबंधित बैंक शाखा में भी जाकर व्यक्तिगत दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। बताया कि प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना के तहत फ सलों का ग्राम पंचायत स्तर पर बीमा कराया गया है। ओलावृष्टि व जलभराव से खड़ी फ सल की उपज में ग्राम पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत से अधिक क्षति की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में सर्वेक्षण कराकर बीमित किसानों को बीमा कंपनी द्वारा तात्कालिक सहायता के रूप में बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है।
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