उन्नाव। इस बार रिकार्ड पड़ रही ठंड, कोहरे और इधर के दिनों में हुई बारिश ने पान उत्पादकों को तगड़ा झटका दिया है। ठंड और कोहरा पड़ने से पान के पत्ते तैयार होने से पहले ही टूट रहे हैं। अधिकांश पत्तों में कीट व रोग लगने से पान की 75 फीसदी फसल खराब हो चुकी है।
पुरवा तहसील क्षेत्र के 29 गांवों में पान की खेती होती है। इन गांवों में अतरसई, दरसवां, दऊ, असावर, लालाखेड़ा, पाठकपुर, कांथा, बिकामऊ, सहरावां, पुरवा, हिलौली, रामपुर, सोहो, मिर्री, जबरेला, तुसरौर, बानीगांव, बेहटा, केवनी व कसरौर समेत अन्य शामिल हैं। इन गांवों के किसान किराए पर जमीन लेकर उसमें पान की खेती करते हैं। सबसे पहले भीठ (घासफूस से झोपड़ीनुमा) तैयार करते हैं। इसके बाद पान की पौध लगाकर खेती की शुरुआत होती है। करीब पांच से छह माह में पान तैयार होता है। यहां के पान की कानपुर, लखनऊ, बनारस समेत अन्य जिलों में सप्लाई होती है। इससे जुडे़ किसान पान का उत्पादन करके साल भर की घर-गृहस्थी चलाने की व्यवस्था करते हैं। हालांकि इस बार मौसम की मार से पान का उत्पादन गिरने की आशंका से किसानों के चेहरे उतरे हुए हैं।
करीब एक माह पड़ी ठंड व कोहरे से जहां आम जनमानस परेशान रहा। वहीं अन्य फसलों की तरह ही पान की खेती भी प्रभावित हुई। वहीं पिछले दिनों हुई बारिश ने कोढ़ में खाज का काम कर दिया है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से भीट में पान के पत्ते टूटकर जमीन पर गिर गए हैं। इससे किराए की भूमि लेकर पान की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। फसल बर्बाद होने से इस बार पान के महंगा बिकने की आशंका बढ़ गई है।
पान की खेती काफी खर्चीली है। एक बीघा में पान की खेती करने में भीठ तैयार करने और बेड़ लगाने आदि में करीब दो लाख का खर्च आता है। पान को तैयार होने में हल्की ठंड का मौसम चाहिए, लेकिन इस बार मौसम ने तगड़ा झटका दिया है। लगातार एक माह से कड़ाके की ठंड और कोहरे से पान को नुकसान पहुंचा है। किसानों में रामभजन चौरसिया, अंबिका, प्रदीप, मुनेश्वर, लालता, राजोले, अनुज, प्रकाश, लक्ष्मीनारायण व संजय आदि किसानों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा उद्यान विभाग के माध्यम से 1500 वर्ग मीटर पर 75 हजार का अनुदान दिया जाता है। हालांकि यह सब किसानों को नहीं मिल पाता है। इस बार मौसम के प्रतिकूल होने से पान उत्पादकों के सामने लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।