वर्ष 2015 रेल सेवाओं के लिए प्रगतिशील साबित होगा। इस वर्ष रेल विभाग यात्रियों को कई सौगातें देने जा रहा है। नए साल में रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर निर्माणाधीन अत्याधुनिक कंट्रोलरूम बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा रेलवे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी दुरुस्त की जाएगी। आरपीएफ व जीआरपी भी हाईटेक किए जाएंगे। कुल मिलाकर नया साल रेलयात्रियों के लिए काफी राहत भरा साबित हो सकता है।
उन्नाव जंक्शन के कंट्रोलरूम को कंप्यूटरीकृत करने का काम शुरू हो चुका है। वर्ष 2015 में यह काम भी शुरू कर देगा। मौजूदा समय में कंट्रोलरूम पुरानी व्यवस्था पर चल रहा है। अप व डाउन आउटरों पर पश्चिम व पूर्व दो केबिन स्थित हैं। इनमें एक केबिन मास्टर व केबिनमैन की तैनाती है।
इस समय किसी भी ट्रेन को रिसीव करने के लिए कंट्रोलरूम में बैठे स्टेशन मास्टर को केबिन इंचार्ज को बताना पड़ता है कि अमुक नंबर पर ट्रेन आ रही है, सिग्नल के लिए लीवर खींचो। इस प्रक्रिया में समय लग जाता है, जिससे अधिकांश ट्रेनों को आउटर पर ही रुकना पड़ता है।
कंट्रोलरूम के अत्याधुनिक हो जाने पर आउटर केबिनों को खत्म कर दिया जाएगा। कंट्रोलरूम में ही बैठे अधिकारी ट्रेनों के आवागमन को देखेंगे। किस ट्रेन को किस नंबर पर लेना है, इसकी पूरी जानकारी एएसएम को ही रहेगी। रेलवे परिसर में ट्रैकों पर लगे कांटे (इलेक्ट्रानिक बक्से) के पास मोटर प्वाइंट लगेगा। यहां से तार का केबिल डालकर कंट्रोलरूम में लगे बटन से सेट करेंगे। ट्रेन आते ही स्टेशन मास्टर बटन पुश करेगा तो सिग्नल लोअर हो जाएगा और पटरी अपने आप सेट हो जाएंगी।
लखनऊ की तर्ज पर उन्नाव रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था भी जल्द सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी। इसके अलावा स्टेशन के बाहर अव्यवस्थित वाहन खड़े करने पर ई-चालन किया जाएगा। ओवरब्रिज के नीचे दोनों ओर बाउंड्रीवॉल का घेरा बना जाएगा, ताकि बेटिकट यात्रियों का आवागमन रोका जा सके। वहीं आरपीएफ को हाईटेक बनाने के लिए उन्हें वाहन की सुविधा दी जाएगी।
अभी तक रेलवे पुलिस के पास खुद का वाहन नहीं है। ऐसे में किसी भी घटना में पहुंचने के लिए उन्हें ट्रेनों का ही सहारा लेना पड़ता है। पूर्व में कई बार इसके लिए मुख्यालय को पत्र भी भेजा जा चुका है। मुख्यालय के अफसरों ने नए साल में चार पहिया वाहन दिए जाने का आश्वासन दिया है। इससे रेलवे पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए ट्रेनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
रेलवे स्टेशन पर नए साल से जमीन पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार नहीं करना होगा। वर्ष 2015 में रेलवे प्लेटफार्मों पर कुर्सियों की व्यवस्था कराई जाएगी। सांसद निधि से भी कुछ नई बेंच व कुर्सिंयां मिलेंगी। पानी के लिए एक आरओ लगाया जाएगा। वहीं प्लेटफार्म नंबर 2/3 और 4/5 के टीनशेड को भी और आगे बढ़ाया जाएगा। प्लेटफार्मों के उच्चीकरण के साथ विस्तारीकरण भी होगा।
नए साल में रेलवे की सिग्नल प्रणाली भी और दुरुस्त होगी। इसके लिए प्लेटफार्म एक पर बड़ा सा सिग्नल टॉवर लगाया गया है। जानकारों की मानें तो अब सोनिक, गंगाघाट के साथ अजगैन स्टेशन पर भी सिग्नल टॉवर लगाए जाएंगे। अगले साल यह काम पूरा हो जाएगा।
इसके बाद आए दिन सिग्नल फेल होने की आशंका काफी कम हो जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, टॉवर खड़े होने के बाद ट्रेन चालकों को वॉकीटॉकी की जगह मोबाइल देने की योजना है। हर स्टेशन पर टॉवर लगने के बाद सिग्नल बेहतर मिलने से ट्रेनों की स्पीड भी बढ़ जाएगी।