विज्ञान किट खरीदारी में बीईओ का एक और खेल सामने आया है। बिना क्रय समिति की बैठक किए ही 832 जूनियर स्कूलों में विज्ञान किट खरीदारी की गई है। शासन से जांच शुरू होने के बाद क्रय समिति बैठक का अभिलेख मांगा गया तो होश उड़ गए हैं। अब अफसर बैक डेट में क्रय समिति बैठक का कोरम पूरा करने में जुट गए हैं।
विज्ञान किट घालमेल के खेल की पोल ‘अमर उजाला’ ने खोली तो पहले डीएम अब मुख्य सचिव ने जांच शुरू कराकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जांच के पहरे से ब्लाक स्तरीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। शुक्रवार को शासन स्तर से जांच रिपोर्ट में क्रय समिति बैठक की रिपोर्ट भी मांग दी गई है। जो मुसीबत का सबब बन गई है। क्योंकि क्रय समिति संबंधी जैसी कोई बैठक ही किसी ब्लाक में न हुई।
बल्कि बीईओ के निर्देश पर शिक्षकों ने 8 हजार रुपये की ब्लैंक चेकें जरूर दे दी। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में क्रय समिति बैठक न होने की पुष्टि शिक्षकों के साथ ही विभागीय सूत्रों ने की है। साथ ही यह भी बताया कि इस तरह के शासनादेश व क्रय लेटर तक से जिम्मेदार अंजान रहे। शासन से अभिलेख मांगे जाने पर आनन-फानन कानपुर के एक बीईओ से शासनादेशा मांगा गया।
जिसके बाद अब क्रय समिति बैठक को स्कूल कार्रवाई रजिस्टर पर बैक डेट में दर्ज करने का ‘खेल’ खेला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जिन स्कूलों के रजिस्टर में जगह नहीं है। नए रजिस्टर पर कार्रवाई दर्ज की जा रही है। इसके अलावा शिक्षकों से जबरजस्ती 8 हजार रुपये कीमत की किट खरीदारी का क्रय लेटर इकटठा कर रहे हैं। कागजी अभिलेख इकटठा कर विभागीय अधिकारी घालमेल के खेल को पूरी तरह छिपाने में ताकत झोंक दी है। इस खेल में एक आला अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है।
पांच सदस्यीय होती है क्रय समिति
विद्यालय प्रबंध समिति का अध्यक्ष। विद्यालय प्रबंध समिति का सचिव। विज्ञान अथवा गणित विषय का कोई एक शिक्षक। दो जागरूक अभिभावक जो समिति सदस्य हों। इनमें से एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य।