बीघापुर के दूलीखेड़ा पांडु नदी पर बने लकड़ी के पुल को हटाते श्रमिक।
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बीघापुर। जिला प्रशासन ने खतरे को देखते हुए पांडु नदी के टूटे पुल पर ग्रामीणों द्वारा बनाए गए बांस-बल्ली के पुल को शुक्रवार को हटवा दिया। इससे ग्रामीण खतरे से तो बच गए हैं, लेकिन परेशानी बरकरार है। डीएम ने बताया कि सेतु निगम को पीपा पुल या अन्य कोई वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए कार्य योजना बनाने को कहा गया है।
ग्रामसभा दूलीखेड़ा व लालाखेड़ा के मजरों को आपस में जोड़ने के लिए वर्ष 2009-10 में ग्राम पंचायत द्वारा पक्के पुल का निर्माण कराया गया था। उसी वर्ष बाढ़ आ जाने से 15 मीटर हिस्सा बह गया था। ग्रामीण शेष बचे पुल के हिस्से पर बांस- बल्ली का अस्थाई रास्ता बनाकर आवागमन कर रहे थे। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने मौके पर जांच के लिए पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम की टीम को भेजा था। टीम ने जांच के बाद पुल निर्माण पंचायतीराज विभाग द्वारा कराए जाने की जानकारी दी थी।
दूसरे दिन डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने डीएम को दी गई जांच रिपोर्ट में पुल से आवागमन को खतरनाक बताया था। बाकी बचा पुल भी काफी जर्जर होने और कभी भी टूटकर गिरने की रिपोर्ट दी थी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम रवींद्र कुमार ने खतरे वाले पुल से आवागमन रोकने के निर्देश दिए थे। ग्राम पंचायत की ओर से पुल के दोनों तरफ आवागमन को प्रतिबंधित करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। शुक्रवार को बक्सर चौकी इंचार्ज आशुतोष मिश्र मौके पर पहुंचे और मजदूरों से पुल का बांस, बल्ली वाला हिस्सा गिरवा दिया।
नदी पार करेंगे या 10 किमी का चक्कर
पुल से आवागमन के लिए बनाए गए लकड़ी के एप्रोच को तोड़ने के बाद ग्रामीणों ने जल्द पुल या वैकल्पिक रास्ता बनाने की मांग की है। लोगों ने बताया कि दूसरी तरफ जाने के लिए या तो नदी पार करनी होगी या 10 किमी का चक्कर लगाना होगा। चौड़ा पुरवा निवासी आशीष यादव ने बताया कि वह पढ़ाई के लिए इसी पुल से फतेहपुर चौडगरा जाते हैं। अब पुल के हट जाने के बाद 10 किमी का चक्कर लगाकर जाना होगा। किसान रामसुमेर, ब्रजपाल, गोविंद, राम किशोर ने बताया कि प्रशासन को कोई वैकिल्पक व्यवस्था करनी चाहिए थी।