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आशा कार्यकर्ताओं ने लगाया उगाही का आरोप, प्रदर्शन

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औरास। केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाया गया मानदेय देने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाकर आशा व संगिनियों ने पीएचसी परिसर में हंगामा काटा। उन्होंने खंड विकास अधिकारी को संबोधित ज्ञापन उनकी गैरमौजूदगी में एक ग्राम सचिव को सौंपकर जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
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औरास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूदा समय में 161 आशा व संगिनी कार्यरत हैं। मई 2019 में केंद्र सरकार ने आशा बहुओं व संगनियों का प्रतिमाह 750 रुपये मानदेय बढ़ाया था। आशाओं का आरोप है कि बढ़े मानदेय को देने के नाम पर स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ने आशाओं को धमकाकर प्रति आशा 1200 रुपये की वसूली की। जिसमें उसका साथ प्रभारी चिकित्साधिकारी ने भी दिया। आरोप है कि जिन आशाओं या संगिनियों ने पैसा नहीं दिया उन्हें पत्र जारी कर हटा देने की धमकी दी। पैसा लेने का विरोध करने पर संगिनी शैलेश और सुनीता पाल को नोटिस जारी कर दी गई। आशाएं व संगिनियां करीब आधा घंटे पीएचसी में अवैध वसूली के खिलाफ नारेबाजी कर विकास खंड कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने खंड विकास अधिकारी को संबोधित ज्ञापन एक ग्राम सचिव को सौंप दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
उधर, इस प्रकरण में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने वसूली के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी की भूमिका की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच के लिए सौरभ सोनकर और डॉ. नितिन श्रीवास्तव को लगाया गया है। जिसकी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अप्रैल माह से सभी बढ़ा मानदेय लागू कर दिया है। वहीं, पिछले मानदेय के बारे में बताया कि सभी आशाओं और संगिनियों ने एरियर की मांग की थी जिसको बनवा दिया गया है। बताया कि ब्लॉक कम्युनिटी प्रोग्राम मैनेजर मातृत्व अवकाश पर हैं। जिनका चार्ज रोहित यादव के पास था। उनकी ड्यूटी उन्नाव में लगी है। इसलिए लागू मानदेय व एरियर ट्रांसफर नहीं हो पाया था। जल्द ही मानदेय व एरियर खातों में पहुंच जाएगा।
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