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सूर्योदय से पहले हादसे ने कवि प्रमोद तिवारी व केडी शर्मा को छीना

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हादसे में क्षतिग्रस्त हुई कार। - फोटो : amarujala
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उन्नाव। सोमवार का सूरज उगने से पहले ही कविता के दो देदिप्तमान नक्षत्र डूब गए। कवि प्रमोद तिवारी व केडी शर्मा हाहाकारी की हादसे में मौत हो गई। यह सूचना मिलते ही हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई। जो जहां था वहीं से उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। दोपहर बाद दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। वे कार से रायबरेली के लालगंज से काव्यपाठ कर लौट रहे थे।

कानपुर जिले के थाना शिवली के गांव मवइया निवासी गीतकार व वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार तिवारी (58) अपने साथी उन्नाव जिले के मियागंज ब्लाक के कस्बा हैदराबाद निवासी हास्य कवि कृष्णदत्त शुक्ल उर्फ केडी शर्मा हाहाकारी (68) के साथ रविवार को रायबरेली के लालगंज में प्रकाश गुप्ता की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में गए थे। रात में काव्य पाठ के बाद दोनों कार से लौट रहे थे। कार प्रमोद तिवारी चला रहे थे।
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सोमवार तड़के करीब तीन बजे वे अचलगंज थाना क्षेत्र आजाद मार्ग चौराहा के पास पहुंचे। वे लखनऊ-कानपुर हाईवे की ओर कार मोड़ रहे थे तभी रायबरेली की ओर जा रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि गीतकार प्रमोद तिवारी की सांसें चलते देख पुलिस ने  जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। कवियों के पास से मिले मोबाइल से पुलिस ने घर वालों को हादसे की सूचना दी। सूचना मिलते ही परिवार व उनके परिचित तमाम लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अचलगंज थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि चालक को ट्रक सहित पकड़ा गया है। तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

कौन थे प्रमोद तिवारी
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवारी कई समाचार पत्रों में सेवाएं देने के साथ ही कविता के मंच पर भी सिरमौर रहे। ‘आज बहुत आते हैं गुड्डे गुड़ियों वाले दिन’, जो कहना है कहूंगा, दिया तो जलूंगा और जलूंगा तो बुझूंगा भी... जैसे गीतों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। कानपुर शहर के कल्याणपुर के पास स्थित पत्रकारपुरम में रहने वाले प्रमोद तिवारी की गिनती हाजिर जवाब पत्रकारों में होती थी।
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केडी शर्मा
केडी शर्मा हाकाकारी उन्नाव के सुमेरपुर के बाबूखेड़ा स्थित ईश्वरानंद इंटर कालेज में कला के अध्यापक थे। 2012 में सेवानिवृत्त हुए। हाहाकारी ने अवधी को संवारने की लगातार कोशिश की। उन्हें तुलसी पीठ की ओर से  2016 में तुलसी सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा समय-समय पर विभिन्न काका हाथरसी सहित विभिन्न सम्मान से नवाजा गया।
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