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प्रह्लाद से लेनी चाहिए सच्ची भक्ति की प्रेरणा- पं. अनिल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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गंजमुरादाबाद। जगटापुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पं. अनिल कुमार शास्त्री ने कहा कि प्रहलाद से सच्ची भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए। दूसरों को कष्ट या क्षति पहुंचाने वाले काम न करें।
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उन्होंने हिरण्यकश्यप की कथा सुनाते हुए कहा कि वह स्वयं को ईश्वर मान बैठता है और खुद की पूजा कराने लगा। उसकी पूजा न करने वालों को वह मृत्यु दंड देने पर आमादा होने लगता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद पिता के बजाय भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए आराधना करता है। पिता की ओर से समझाने के प्रयास विफल साबित होते हैं। प्रहलाद हरि नाम का स्मरण करना नहीं बंद करते हैं। इस पर वह अपने पुत्र का वध करने की तैयारी करता है। प्रहलाद को खंभे से बंधवा देता है। प्रहलाद बिना विचलित हुए अपने आराध्य भगवान विष्णु का स्मरण करते रहते हैं। इस पर अपने भक्त बालक की पुकार सुनकर भगवान नरसिंह रूप में प्रकट होते हैं। पुत्र का वध करने के इरादे से हिरण्यकश्यप के तलवार उठाते ही नरसिंह रूपधारी विष्णु भगवान दुराचारी राजा को अपनी जंघाओं पर लिटाकर नखों से पेट फाड़कर वध कर देते हैं। समाज को उसके आतंक से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही कथा स्थल भगवान के जयकारे से गूंज उठता है।
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