गंजमुरादाबाद। कोल्ड स्टोर में मौजूद आलू की कीमत थोक में मात्र 400 रुपये प्रति क्विंटल होने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। जबकि इसमें लागत प्रति क्विंटल 800 रुपये आई है। ऐसी स्थिति में कोल्ड स्टोर से आलू सड़क पर फेंके जाने के संकेत से किसान मायूस हैं।
क्षेत्र में भारी मात्रा में सब्जियों के राजा आलू की खेती की जाती है। पिछले वर्ष आलू की बंपर पैदावार हुई थी। जिससे क्षेत्र के सभी कोल्ड स्टोर हाउसफुल हो गए थे। कोल्ड स्टोर में जगह न मिलने के कारण मजबूरन किसानों ने औने-पौने दामों में लखनऊ और कानपुर की मंडियों में बेचा था। कोल्ड स्टोर में भंडारित करने वाले आलू किसानों ने बीज के तौर पर अच्छे दामों में बिक्री होने की उम्मीद लगाई थी। किसानों को खेत की जुताई, बीज, आलू की गड़ाई, कीटनाशक का छिड़काव, खाद और सिंचाई के साथ ही कोल्ड स्टोर तक पहुंचाने तक करीब 500 रुपये की लागत आती है और 310 रुपये कोल्ड स्टोर के भंडारण का खर्चा आता है।
जिससे कम से कम 800 रुपये प्रति क्विंटल लागत आ रही है। मौजूदा समय में थोक रेट में आलू प्रति क्विंटल 400 रुपये में बिक रहा है। जिससे लागत से भी आधी रकम किसानों को वापस मिल पा रही है। इससे किसानों को भारी घाटा होने की आशंका बनी हुई है। यदि अक्तूबर तक आलू के दामों में उछाल नहीं आया तो किसान कोल्ड स्टोर से आलू नहीं निकालेंगे। जिससे किसान कोल्ड स्टोर से आलू सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हो जाएंगे। क्षेत्र के बागीस कटियार, चंद्रपाल यादव, गुड्डन कटियार, राकेश कटियार, संजय कटियार, विनोद कटियार, सुनील कटियार, अजीत कटियार, मुकेश कुमार, रामनरेश, विवेक कटियार, अनिल कटियार और राजकुमार आदि किसानों ने बताया कि लागत और बिक्री में आधे का अंतर होने से भारी घाटा हो रहा है।
कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी देवी सिंह ने बताया कि किसानों को आलू के अलावा अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों की भी खेती करनी चाहिए। इससे एक फसल पर निर्भरता खत्म होगी। दलहन और तिलहन की उपज को एक निश्चित समय में बिक्री करने की मजबूरी नहीं होती। सालों सुरक्षित भंडारण किया जा सकता है। जब अच्छा भाव मिले तब बिक्री की जा सकती है।