उन्नाव। नतीजे घोषित होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए सरगर्मी शुरू हो गई है। कहीं सत्तादल जोड़तोड़ में जुटा है तो कहीं विपक्षी और निर्दलीय। जिला पंचायत अध्यक्ष पर फिर काबिज होने का मंसूबा संजोए भाजपा के समर्थित प्रत्याशियों की संख्या कम होने से राह मुश्किल नजर आ रही है। जबकि सत्तादल पर भारी पड़े सपाईयों के हौसले बुलंद हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य सीट पर सभी राजनैतिक दलों ने समर्थित प्रत्याशी उतारने की घोषणा की थी। इसमें भाजपा ने सभी 51 सीटों पर समर्थित प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस ने 41 प्रत्याशियों को समर्थन देकर चुनाव मैदान में उतारा था। सपा ने 40 और बसपा ने 26 प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। चुनाव नतीजे सामने आए तो सबसे ज्यादा प्रत्याशी उतारने वाली भाजपा के सिर्फ आठ समर्थित उम्मीदवार ही जीत दर्ज करा सके। मुख्य विपक्षी दल सपा के उम्मीद से ज्यादा 19 प्रत्याशी जीतकर आए। बसपा को तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। बाकी 21 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का डंका बजाया। सबसे ज्यादा 19 जिला पंचायत सदस्य जिताने के बाद अब अध्यक्ष पद पर सपा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
जिला पंचायत में कुल सदस्य संख्या 51 है। अध्यक्ष बनने के लिए आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन जरूरी है। अध्यक्ष बनने के लिए 26 सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में सपा को सिर्फ सात और सदस्यों का समर्थन चाहिए। भाजपा को 17 सदस्यों का समर्थन जुटाना पड़ेगा। हालांकि भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में समर्थित प्रत्याशी उतारना सिर्फ औपचारिकता है। जिसके पक्ष में ज्यादा समर्थक होंगे वही अध्यक्ष चुना जाएगा। अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक दावेदार का कहना है कि निर्दलीय चुनाव जीतने वाले सदस्यों की संख्या 21 है। वह जिसके पक्ष में मतदान करेंगे वही अध्यक्ष बनेगा।