कोमल मन यानी किशोर अपराधियों या पीड़ितों से संबंधित मामलों के निस्तारण और जांच के लिए शहर में एक बाल थाना बनेगा। इस थाने में अधिकांश संख्या महिला पुलिस कर्मियों की होगी। वहीं पुलिस ऐसे बुजुर्गों के घर जाकर हर सप्ताह हालचाल लेगी जिनके बच्चे न होने या बाहर होने से बुजुर्ग घर में अकेले रहते हैं। एएसपी ने बताया कि ऐसे बुजुर्गों का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
किसी अपराध व दुष्कर्म की शिकार किशोरी या बच्ची, किसी अपराध के आरोप में गिरफ्तार किशोर या बच्चा या फिर किशोरावस्था वाले पीड़ित या आरोपी उन्हें अब कोतवाली थाना या पुलिस चौकी नहीं जाना पड़ेगा। थानों में पुलिसिया पूछताछ के पुराने तरीके से भी रूबरू नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश सरकार के निर्देश पर उन्नाव शहर में भी एक बाल थाना खुलेगा। एसपी ने सदर चौकी में बाल थाना खोलने की अनुमति भी दे दी है। इस बाल थाने में जिले के किसी भी थानाक्षेत्र में हुई ऐसी घटना जिसमें पीड़ित आ आरोपी किशोरावस्था तक का है।
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उसके मामले की जांच और पूछताछ इसी बाल थाने में होगी। यहां महिला इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों की संख्या अधिकांश रहेगी। महिला पुलिस कर्मी इन कोमल मन वाले पीड़ितों या आरोपियों के हमदर्द बनकर पूछताछ करेंगे। एएसपी ने बताया कि बच्चे मन के कोमल होते हैं। उनमें और प्रौढ़ या पेशेवर अपराधी में काफी फर्क होता है। कोमल मन पर पुलिस के दबाव व सख्ती का कुप्रभाव भी पड़ सकता है जिसका असर उसकी पूरी जिंदगी पर भी पड़ता है।
पुलिस बुजुर्गों की भी हमदर्द बनेगी। ऐसे बुजुर्ग जिनके कोई संतान नहीं है या संतान के बाहर होने से वह अकेले रहते हैं। ऐसे लोगों से पुुलिस हर सप्ताह उनके घर जाकर हालचाल लेगी। अगर किसी को कोई समस्या होगी या संपत्ति के लिए कोई बाहरी व्यक्ति या परिवार व रिश्तेदार परेशान करेगा तो पुलिस उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। अपर पुलिस अधीक्षक आरएस गौतम ने बताया कि सभी थानाध्यक्षों को रजिस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। एक सब इंस्पेक्टर सप्ताह में एक बार बुजुर्ग के घर जाकर उनका हालचाल लेगा।