इस तरह से होती है जैविक खेती
उप कृषि निदेशक के मुताबिक जैविक खेती देशी गाय के गोबर एवं गो-मूत्र पर आधारित है। दो सौ लीटर प्लास्टिक के ड्रम में 180 लीटर पानी भरकर उसमें 10 किलो गोबर, दस किलो गोमूत्र, दो किलो बेसन, दो किलो गुड़, आधा किलो बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी मिलाकर दो दिन तक लकड़ी से चलाते हैं।
इसको देशी खाद (जीवामृत) कहते हैं। गर्मियों में यह दो दिन में और सर्दियों में तीन दिन में तैयार हो जाता है। किसान खेत में पलेवा या सिंचाई के समय पानी के साथ प्रयोग करते हैं। इसके प्रयोग के बाद रासायनिक उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती है। जैविक खेती से उत्पादित अनाज भी मिलावट रहित और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
जैविक खेती के प्रति रुझान को देखकर ही अरविंद का प्रधानमंत्री से बातचीत के लिए चयन किया गया है। प्रदेशभर में केवल उन्नाव के ही किसान को चयनित किया जानाजिले के लिए गर्व की बात है।
रवींद्र कुमार, डीएम