उन्नाव। लाखों रुपये के घोटाले का आरोप सिद्ध होने पर सफीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पीखी के प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए हैं। गांव में विकास कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है।
वहीं, घोटाले की धनराशि की बराबर-बराबर वसूली प्रधान और तत्कालीन सचिव के साथ कुछ हिस्सा तकनीकी सहायक से भी वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं।
विकासखंड सफीपुर की ग्राम पंचायत पीखी में प्रधान व तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने कागजों पर विकास कार्य दिखाकर लाखों की धनराशि का बंदरबांट किया। मामले का खुलासा अमर उजाला ने 11 नवंबर 2014 के अंक में किया था। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए जिला उद्यान अधिकारी को नामित किया।
बाद में सहायक श्रमायुक्त को जांच सौंपी गई। जांच अधिकारी ने गांव जाकर विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया तो पता चला कि कई कार्य कागजों पर कराकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। मनरेगा में 90,927 रुपये और राज्य/13वें वित्त में 12,65,000 रुपये समेत कुल 13,55,927 लाख रुपये का गबन किया गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान सिराज अहमद को नोटिस भेज साक्ष्य सहित पक्ष रखने को कहा गया।
प्रधान ने दिनांक रहित आवेदनपत्र प्रस्तुत कर बिना किसी उपयुक्त आधार के जांच रिपोर्ट को संदिग्ध बताते हुए पुन: जांच की मांग की गई। जिला प्रशासन ने इसे नहीं माना और लाखों रुपये के घोटाले का दोषी पाया। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधान सिराज के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए और तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। समिति में राजदुलारी, अयाज अहमद व टेकचन्द को शामिल किया गया है।
प्रधान, सचिव व टीए से होगी वसूली
गबन की गई राज्य/13वें वित्त की धनराशि की प्रधान और सचिव से और मनरेगा धन की रिकवरी प्रधान, सचिव व टीए से बराबर-बराबर कराने के आदेश जारी किए गए। प्रधान सिराज अहमद और तत्कालीन सचिव रामशंकर यादव से 6,62,809 रुपये और तकनीकी सहायक से 30,309 रुपये की रिकवरी कराई जाएगी।
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