उन्नाव। सौ अधिक लाशें मिलने से चर्चा में आए परियर के लिए एक राहत भरी खबर है। इसके पुरातन महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने परियर क्षेत्र का चयन किया है। जिला वनधिकारी को नोडल अफसर बनाकर सात सदस्यीय जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन भी कर लिया गया है।
डिग्री कालेज की एक महिला प्रोफेसर को रिसोर्स पर्सन के तौर पर रखा गया है। जो क्षेत्र के एतिहासिक वृक्षों, जड़ी-बूटी, जीव, बौद्धिक, कृषि संपदा को संरक्षित व बढ़ाने के लिए तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएंगी।
समिति द्वारा एक रजिस्टर भी तैयार किया जाएगा, जिसमें यहां के एतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी दर्ज होगी। इस पूरी योजना का उद्देश्य क्षेत्र के पुरातन महत्व व धरोहर का प्रचार-प्रसार करना है, ताकि स्थानीय संपदा को बढ़ावा दिया जा सके।
उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की सचिव प्रतिभा सिंह द्वारा तैयार की गई इस योजना में प्रदेश के सभी 75 जिलों से एक-एक गांव का चयन किया जा रहा है। बोर्ड ने इसके लिए हर जनपद के जिला वनाधिकारी को नोडल अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया है।
उन्नाव में यह जिम्मेदारी डीएफओ वीके मिश्रा को दी गई है। नोडल अफसर द्वारा परियर गांव की प्रधान प्रभावती की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है। जिसमें गांव की ही कृषक दुलारी, किरण, वैद्यनाथ, सुखवीर, श्रीकृष्ण व मन्नू को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।
तकनीकी जानकारी को पुख्ता करने के लिए डीएसएन कालेज की जुलोजी विषय की प्रोफेसर डा. अल्का मिश्रा को रिसोर्स पर्सन के तौर पर कमेटी में रखा गया है। यह कमेटी परियर के प्राचीन वृक्षों, जड़ी-बूटी, जीव, बौद्धिक व कृषि संपदा के बारे में जानकारी एकत्र करेगी।
पता लगाया जाएगा कि प्राचीन काल से जिन जड़ी बूटी के माध्यम से यहां के वैद्य मरीजों का इलाज करते चले आ रहे हैं वह कौन-कौन सी हैं। इसके लिए क्षेत्र के वैद्यों की भी मदद ली जाएगी। परियर स्थित माता जानकी कुंड, दो विशाल वट वृक्ष व यहां के पुरातन इतिहास को भी सहेजा जाएगा।
इस काम के लिए एक जैव विविधता रजिस्टर भी तैयार किया जाएगा। जिसमें इन सबके बारे में जानकारी एकत्र होगी। इस रजिस्टर को जनवरी 2015 के अंत तक तैयार करने के आदेश बोर्ड ने दिए हैं।
सहजे जाएंगे परियर के सारस, कछुए और चमगादड़
उन्नाव। इस पूरी योजना के तहत यहां के जीवों को भी संरक्षित करने की तैयारी है। जिसमें यहां के प्रसिद्ध सारस, कछुए व चमगादड़ों को सहेजा जाएगा। इनकी संख्या में वृद्धि करना और इनके रहने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना समिति का काम होगा।
परियर के दो विशाल वट वृक्षों की तैयार करना और अन्य वृक्षों को तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। जगह-जगह इनके महत्व को दर्शाते हुए बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
बोर्ड उठाएगा सारा खर्च
उन्नाव। इस पूरी योजना में जो भी खर्च आएगा वह बोर्ड उठाएगा। समिति कार्य का प्रस्ताव देगी, जिसके बाद बोर्ड तकनीकी टीम से इसका आकलन कराएगा। तकनीकी टीम द्वारा प्रस्ताव को हरी झंडी देने के बाद बोर्ड पैसा स्वीकृत करेगा। जिसके बाद नोडल अधिकारी की अध्यक्षता व समिति की देखरेख में कार्य कराया जाएगा।
वर्जन
परियर के पुरातन महत्व को देखते हुए यहां की जैव विविधता को सहेजने के लिए योजना तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा नोडल अफसर बनाया गया है, समिति भी बना दी गई है। जो पूरे क्षेत्र में एतिहासिक चीजों के बारे में जानकारी कर उनके प्रचार-प्रसार की योजना तैयार करेगी। - वीके मिश्रा, जिला वनधिकारी, उन्नाव