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लकड़बग्घा की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत

Wed, 06 Jul 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /उन्नाव
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जानकारी देते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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ग्राम मुस्तफ ापुर में रहने वाले वीरपाल, रामविलास, मुकेश ने बताया कि वह सभी सुबह शौच करने को गौरीशंकर के बाग की ओर जा रहे थे तभी उन्हें रास्ते में नन्हक्के के खेत से होकर रामचंदर और रवि के खेत से निकलते हुए एक बड़े आकार का जानवर देख वह तीनों भागे और गांव के अन्य लोगों को जानकारी दी।
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ग्रामीण लाठी डंडे लेकर जंगल की ओर निकले और जिस रास्ते से जानवर निकला था उसके पंजे के निशान मिलने से ग्रामीण दहशत में हो गए। गांव के पप्पू, नन्हक्कें, बडक्कें, राजेश, राकेश ने बताया कि पंजे के निशान काफ ी बड़े थे। सूचना पर वन विभाग से वन प्रसारकर्ता देवेंद्र सिंह, सतीश चंद वाजपेयी और गिरीश चंद्र दुबे मौके पर पहुंचे जिन्होंने पंजों के निशान का निरीक्षण किया।

वन कर्मियों ने बताया कि पंजे के निशान लकड़बग्घा के है जो कहीं से भटकता हुआ यहां आ पहुंचा है। जिला वन अधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि वन कर्मियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर पंजों के निशान लकड़बग्घे के है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है।
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नहीं किया गया मांद का निरीक्षण
वन विभाग कर्मी मौके पर पहुंचे जरूर लेकिन उन्होंने खेतों पर रहे पंजों के निशान देखने के बाद ग्रामीणों से पूछताछ की और चल दिए। लेकिन उस मांद तक नहीं गए जो गौरीशंकर के बाग में थी। जबकि ग्रामीण बार-बार वन कर्मियों से कह रहे थे कि लकड़बग्घा है तो मांद का निरीक्षण कर लिया जाए कम से कम स्थिति स्पष्ट हो जाएंगी। लेकिन किसी भी वन कर्मी की हिम्मत नहीं हुई कि वह मांद का निरीक्षण करता।

लकड़बग्घा इंसानों का दोस्त
डीएफ ओ वीके मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों को डरने की आवश्यकता नहीं है, चूंकि जो देखा गया वह बाघ नहीं बल्कि लकड़बग्घा है जो मरे हुए जीवों को खाता है और इंसानों पर हमला नहीं करता एक तरह से यह इंसानों का दोस्त होता है। जिसे अंग्रेजी में हम हाइना के नाम से जानते है।
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