उन्नाव। हाइवे पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों पर एआरटीआे प्रवर्तन अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। इसके चलते सड़कें ध्वस्त हो रही हैं और राहगीरों की जान भी खतरे में है। सड़कों पर बालू, गिट्टी लदे ट्रक चलने के साथ ही अन्य सामग्रियों के भी ओवरलोड वाहन हर बैरियर को पार कर रहे हैं।
लखनऊ-कानपुर हाइवे से रोजाना हजारों ट्रक अलग-अलग रूटों के लिए निकलते हैं। इनमें से अधिकतर ट्रक ओवरलोड ही निकलते हैं। यह हालत तब है जब एआरटीओ प्रवर्तन रोजाना चेकिंग की बात कहते हैं। वाहनों में लगातार बढ़ रही ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के लिए विधायक से लेकर मंत्री तक बात करते हैं लेकिन उनकी बातें संबंधित अधिकारियों के कानो तक नहीं पहुंचती। इससे सड़कें भी खस्ताहाल होती जा रही हैं। मोटर मालिक भी अपने वाहनों को सड़क पर बिना रोकटोक दौड़ाने के लिए अधिकारियों से लेकर सफेदपोश नेताओं के खास बने हैं।
ऐसे पास होते हैं ओवरलोड वाहन
उन्नाव। माफिया की दो से तीन गाड़ियां लगभग 25 से 50 किलोमीटर के अंतराल पर ट्रक चालकों को लोकेशन देती हैं। ये 50 से 100 ओवरलोड ट्रकों को इकट्ठा करते हैं। इनकी सेटिंग पीटीओ के साथ विभागीय कर्मचारियों से भी रहती है। इससे उनको पूरी सूचना सटीक मिलती है। जब एआरटीओ चेकिंग पर नहीं रहते हैं उस दौरान पीटीओ को पांच सौ से एक हजार रुपये देकर ट्रक पास करा देते हैं।
नापतौल कांटे का आदेश भी हवा में
उन्नाव। ओवरलोडिंग खत्म करने के लिए भले ही सरकार ने घाट संचालकों को नापतौल कांटे लगाने का आदेश दिया है। लेकिन घाट संचालक स्थानीय अधिकारियों की मदद से धड़ल्ले से ओवरलोडिंग करा रहे हैं।
एक साल में अब तक हो चुकी हैं 50 मौतें
उन्नाव। पुलिस विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो ओवरलोड ट्रकों की चपेट में आकर वर्ष 2014 से लेकर अब तक 50 मौतें हो चुकी हैं। ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तो खराब किया ही है साथ ही साइकिल, बाइक, ट्रैक्टर ट्राली, जीप, कार सवार एवं पैदल राहगीर भी इनकी चपेट में आ रहे हैं।
वर्जन
विभाग अपना कार्य लगातार कर रहा है। ओवरलोड ट्रकों की धरपकड़ की जा रही है। रोजाना आधा दर्जन से अधिक ट्रक बंद किए जा रहे हैं। फिर भी स्टॉफ बढ़ाकर कार्रवाई की जाएगी। - राघवेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन