स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों के गायब रहने की आम शिकायतों और स्वास्थ्य सेवा को चुस्त बनाने के लिए नवागत डीएम की ओर से की गई सख्ती के बाद सोमवार को जिले के सीएचसी-पीएचसी प्रभारी एकजुट हो गए और सामूहिक रुप से प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया। देर शाम सभी कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। जानकारी होने पर डीएम ने सभी को बुलाकर वार्ता की और उनकी शिकायतों का निस्तारण का आश्वासन दिया तब मामला शांत हुआ।
मालूम हो कि तीन दिन पहले डीएम सुरेंद्र सिंह ने सभी सीएचसी और पीएचसी का औचक निरीक्षण कराया था जिसमें कई स्वास्थ्य केंद्रों का स्टाफ गायब मिला था। इसपर डीएम ने स्वाथ्य केंद्र प्रभारी समेत कई डॉक्टरों पर कार्रवाई की संस्तुति की थी। कार्रवाई के विरोध में सोमवार को जिले के सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों ने प्रोवेशियल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के लेटर पैड पर लिखित रूप से प्रभारी पद से सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इससे हड़कंप मच गया उनका कहना था कि ब्लाक व तहसील स्तर के अधिकारियों से स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण कराना गलत है। उनकी जांच कोई जिलास्तरीय अधिकारी ही कर सकता है। उनका कहना था कि निरीक्षण के दौरान उनके स्वास्थ्य केंद्र का कोई भी कर्मचारी अनुपस्थित मिलता है तो इसके लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की जा रही है। नियमानुसार स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण डीएम, सीडीओ व एडीएम करने के बाद कार्रवाई के लिए शासन को भेज सकते हैं। बताया कि हाल में हुए निरीक्षण में कई स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। इसके विरोध में सीएचसी-पीएचसी प्रभारी शाम को कलेक्ट्रेट पहुंचे। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने सीएमओ व मेडिकल अफसरों से वार्ता की। आश्वासन दिया कि जिला स्तरीय अधिकारियों से ही जांच कराई जाएगी। इसके अलावा मेडिकल अफसरों की जो भी समस्याएं हैं उनका निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाएगा। इस दौरान सभी 16 ब्लाकों के सीएचसी व पीएचसी प्रभारी मौजूद रहे। डीएम सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मेडिकल अफसरों से वार्ता कर उनकी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। वह सभी नियमित रूप से अपना काम करेंगे।