परंपरागत कृषि विकास योजना एवं नमामि गंगे योजना में जैविक खेती कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। इस मौके पर सीडीओ ने कहा कि जैविक खेती से उत्पादित अन्न पौष्टिक होता है।
विकासभवन सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि किसान जीवामृत, बीजामृत, घनामृत तैयार करके उसके उपयोग से बाजरा, मोटे अनाज, उड़द, मूंग, अरहर व तिल का उत्पादन करें।
बताया कि जैविक खेती से उत्पादित किया हुआ अन्न पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है। यूपी मुख्यालय लखनऊ के तकनीकी समन्वयक डॉ. मुकेश गौतम ने योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। बताया कि 5-5 समूहों के सभी किसानों के यहां जैविक खेती के कार्यक्रम कराए जाएं। उन्होंने जैविक खेती के कृषक उत्पादक संघ गठन करने के लिए भी बायोसर्ट संस्था को निर्देशित करने को कहा।
उप कृषि निदेशक डॉ. नंदकिशोर ने बताया कि जनपद में कुल 1600 हेक्टेअर भूमि में जैविक खेती गंगा किनारे के 8 विकासखंड के 64 ग्रामों में कराए जा रहे हैं। जिसके लिए किसानों को जनपद और राजस्व ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बायोसर्ट इंटरनेशनल प्रा.लि. के अभिषेक आनंद व गिरजेश त्रिपाठी ने किसानों को जैविक खेती की जानकारी दी।
जैविक खेती का कार्य कर रहे नवाबगंज के विजय कुमार मिश्रा ने धान, उड़द, मूंग, चना, सरसों एवं सब्जी की जैविक खेती, सिकंदरपुर सरोसी से मनोहर लाल ने लेमन ग्रास, जिरेनियम खस की खेती, सफ ीपुर के बबलू ने लेमन ग्रास और मियागंज के बच्चनलाल दीक्षित ने प्रजाति काला नमक धान की जानकारी दी। विजय कुमार मिश्र ने जैविक खेती की प्रदर्शनी भी लगाई।