उन्नाव। नियमों की अनदेखी कर गली-कूंचों में खोले गए नर्सिंगहोमों में कब झांसी मेडिकल कॉलेज जैसी घटना हो जाए, कहा नहीं जा सकता। संकरी गलियों में आवासी भवनों और भूतल में संचालित तमाम नर्सिंगहोम तक दमकल पहुंचने का रास्ता तक नहीं है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अभियान चलाकर अवैध नर्सिंगहोम बंद कराने की बात कह रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में जिले के 113 नर्सिंगहोमों का ही पंजीकरण है।
जबकि विभागीय सत्रों का कहना है कि जिले में 400 से अधिक नर्सिंगहोम हैं जो बिना पंजीकरण के ही संचालित हो रहे हैं। हालत यह है कि आवासीय भवनों, गैरेज और भूतल के कमरों में वार्ड बनाकर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
इनमें न तो आग से बचाव के इंतजाम हैं और न ही आग लगने पर उसे बुझाने और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का रास्ता है। हालत यह है कि 15 नर्सिंगहोम तो केवल जिला अस्पताल के सामने से एक किलोमीटर के दायरे में ही खुले हैं, जिनमें अग्नि सुरक्षा के मानक दरकिनार हैं। दिखावे के लिए आग बुझाने के छोटे सिलिंडर लटका दिए गए हैं। कई में तो फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर का कहीं अता-पता तक नहीं है।