एसबीआई की तिजोरी में करीब तीन माह से करेंसी का बना टोटा है। करेंसी की कमी के कारण एसबीआई समेत कई बैंकों के एटीएम एक माह से शोपीस बने हैं। सोमवार चटक धूप में एटीएम धारक बूथ पर पहुंचे पर नो कैश का सिग्नल देख पसीना बहाते लौटने को मजबूर हुए। लगातार एटीएम में करेंसी की कमी से नोटबंदी जैसे हालात हैं। एटीएम ही नहीं बैंकों में भी कैश किल्लत खाताधारकों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा को आरबीआई से फरवरी माह के पहले सप्ताह में 80 लाख की करेंसी मिली थी। इसके बाद एसबीआई ने दो करोड़ की डिमांड की थी। 22 बैंक शाखाओं के अलावा 60 एटीएम की मानीटरिंग करने वाली मुख्य शाखा को मिली 80 लाख की करेंसी नाकाफी साबित हुई। बीते एक माह में मुख्य ब्रांच गैर जिलों से लाखों की करेंसी का जुगाड़ कर जैसे-तैसे लेनदेन चला रहा है।
बड़ी करेंसी के अभाव में एटीएम बूथ पिछले एक माह से शोपीस बने हैं। सोमवार को भी शहर के अधिकतर बैंकों के एटीएम बंद रहे। इस दौरान बड़ी करेंसी की उपलब्धता होने पर चौथे दिन एसबीआई मुख्य ब्रांच का एटीएम दोपहर बाद चालू हो सका। जबकि बैंक आफ बड़ौदा, देना बैंक, बैंक आफ इंडिया, एक्सिस बैंक, आईसीसीआई के एटीएम बंद रहे। चिलचिलाती धूप में लोग कैश की उम्मीद लेकर एटीएम बूथ पर पहुंच रहे थे।
मगर मशीन में नो कैश का मैसेज देख लौट गए। हर किसी की जुबां पर बस एक ही बात थी कि क्या फिर नोटबंदी जैसा कुछ होने वाला है। इस बीच पीएनबी के एटीएम में कैश होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली। एसबीआई शाखा प्रबंधक दीपेंद्र यादव ने करेंसी किल्लत की बात तो स्वीकार की, लेकिन करेंसी मिलने की उम्मीद पर कुछ भी बोलने से इंकार किया।