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उन्नाव में मिला नरमुंड व अस्थियों का जखीरा

Fri, 30 Jan 2015 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। परियर के गंगा घाट पर मिले करीब 104 मानव शवों का रहस्य अभी पूरी तरह से खुला भी नहीं था कि गुरुवार को पुलिस लाइन स्थित एक कमरे में बड़ी संख्या में नरमुंड और मानव अस्थियों के अवशेष मिलने से उन्नाव दोबारा सुर्खियों में आ गया।
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बोरियों में भरकर रखे गए नरमुंड और अस्थियां काफी पुराने हैं, लिहाजा इनका किसी हालिया घटना से कोई जुड़ाव नहीं प्रतीत होता, मगर यह बड़ा सवाल है कि आखिर किन हालात में इतनी बड़ी संख्या में मानव अस्थि अवशेष यहां जमा किए गए।

फिलहाल इन अवशेषों को लेकर राजनीति गरम हो गई है। सरकार पर विपक्षी गंभीर आरोप मढ़ने लगे है।ं अजोबो गरीब यह रहा कि इतना गंभीर मामला होने के बावजूद सूबे के किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने कोई जिम्मेदारी भरा कदम नहीं उठाया।
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स्थानीय अधिकारियों ने अधकचरे बयान देकर मामले में फैल रही अफवाहों को और हवा दे दी। मौके पर मेडिकल विभाग की टीम को बुलाया गया। मेडिकल स्टाफ ने दलील दी कि पोस्टमार्टम के बाद अवशेष कमरे में रखे गए थे। पोस्टमार्टम हाउस बदल जाने से इन अस्थियों पर ध्यान नहीं दिया गया।

पुलिस अधीक्षक एमपी सिंह का कहना है कि कमरे में मिले अस्थि अवशेष सालों पहले विसरा के लिए सुरक्षित रखे गए थे। गौरतलब है कि विसरा सुरक्षित रखने में अस्थियों का कोई काम नहीं है। अगर जायज तरीके से इन अस्थियों को रखा गया तो समय रहते इसका निस्तारण क्यों नहीं किया गया, इस सवाल पर जवाब मिला कि जांच की जा रही है।

आईजी (कानून व्यवस्था) ने पूरे मामले की जांच के लिए डीआईजी आरके चतुर्वेदी को लखनऊ से मौके पर भेजा है। भाजपाइयों ने इस मामले को लेकर हंगामा किया। उनका आरोप है कि कहीं से शवों को लाकर छुपाया गया था। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक पुलिस लाइन में ही पुराना पोस्टमार्टम हाउस है। इसके थोड़ी दूर पर विसरा कक्ष बना हुआ है। पोस्टमार्टम हाउस के जिला अस्पताल के पास स्थानांतरित होने के बाद से यह विसरा कक्ष बंद है।

गुरुवार सुबह विसरा कक्ष में तमाम नरमुंड और अस्थियों के अवशेष पड़े होने की जानकारी मिली। बड़ी संख्या में नरमुंड पड़े होने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए। पुलिस प्रशासन में भी खलबली मच गई। एसपी महेंद्र पाल सिंह एवं एएसपी रामकिशुन यादव दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट वीके वर्मा को मौके पर बुलाया गया।

चीफ फार्मेसिस्ट ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले लावारिस लाशों का विसरा सुरक्षित रखने के आदेश थे। उसीके  तहत बिसरा के तौर पर शव के उन अंगों को सुरक्षित रख लिया जाता था, जिसमें गहरे चोट के निशान पाए जाते थे। पुलिस अस्पताल में ही विसरा कक्ष भी था। बाद में विसरा कक्ष स्थानांतरित हो गया। जिला अस्पताल में भी इसी तरह मानव अंग रखे हुए हैं।

दोनों स्थानों पर करीब चार सौ से अधिक मानव अंग रखे हुए हैं। एसपी एमपी सिंह भी कुछ ऐसा ही इत्तेफाक रखते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि किन परिस्थितियों में जांच के लिए रखे गए नरमुंड एवं अस्थियां पड़ी रह गईं, इसकी जांच कराई जाएगी।

उधर भाजपा सदर विधायक पंकज गुप्ता व पूर्व विधायक कृपा शंकर सिंह के साथ भारी संख्या में मौके पर पहुंचे भाजपाइयों ने हंगामा शुरू कर दिया। विधायक पंकज गुप्ता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। मांग की कि मुकदमा दर्ज कर पता लगाया जाए कि यह नरमुंड कहां से आए और इन्हें अभी तक क्यों रखा गया।

पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में अस्थियां मिलने से इस बात की आशंका है कि किसी बड़ी घटना को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता कृपाशंकर सिंह ने कहा कि 1974 में सीआरपीसी में बदलाव के बाद विसरा के तौर पर शव के कुछ अंदरूनी अंगों को ही लेने का प्रावधान है। इसके अलावा डीएनए टेस्ट के लिए कहीं भी नहीं लिखा है कि हड़्डी को ही नमूने के तौर पर लिया जाए।
 
क्या कहते हैं जिम्मेदार  
लखनऊ। आईजी कानून-व्यवस्था सतीश गणेश ने बताया कि अभी तक इस मामले में जो जानकारी सामने आई है, उसके लिहाज से जिस कमरे से नरमुंड और अस्थि अवशेष बरामद हुए हैं वह कमरा वर्ष 2008 और उससे पूर्व में बतौर पोस्टमार्टम रूम के इस्तेमाल होता था। इसके बाद भी एसपी उन्नाव से मामले की जांच कर नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है।

अगर यह कमरा पोस्टमार्टम रूम के तौर पर इस्तेमाल होता था तो इसमें होने वाले पोस्टमार्टम का ब्यौरा उसके लिए तय अलग रजिस्टर में दर्ज होगा। इस रजिस्टर में जिसका शव है, उसके बारे में पूरी जानकारी भरी जाती है। साथ ही जिन मामलों में विसरा सुरक्षित किया जाता है, उसकी भी जानकारी दर्ज होती है। एसपी को कहा गया है कि वे उक्त रजिस्टर की भी जांच कर लें और यथा संभव बुधवार को ही अपनी रिपोर्ट डीजीपी मुख्यालय को उपलब्ध करा दें।
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