उन्नाव। लंबे समय से नगरीय सुविधाएं पाने का इंतजार कर रहे एक लाख ग्रामीणों को अभी और ‘लंबा इंतजार’ करना पड़ेगा। जल्द शुरू होने वाली जनगणना को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नई नगर पंचायतों के गठन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। जिससे नगरीय क्षेत्रों की सुविधाएं मिलने की आस में बैठे ग्रामीणों को मायूसी हाथ लगी है।
वर्तमान समय में जनपद में तीन नगर पालिका परिषद और 15 नगर पंचायतें हैं। इसी साल जनवरी माह में प्रदेश सरकार ने छह बड़ी ग्राम सभाओं को नगर पंचायत बनाने के लिए प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इन ग्रामसभाओं में सुमेरपुर विकासखंड की बक्सर व पाटन, सिकंदरपुर करन की अचलगंज और हिलौली ब्लॉक की पंचायत लउवासिंहनखेड़ा, मवई व हिलौली शामिल थीं। इसमें अचलगंज में जहां एक मजरा है। वहीं, हिलौली में 18, लऊवासिंहनखेड़ा में 20 व मवई में मजरों की संख्या 37 है। वहीं, बक्सर में कुल मजरे 6 व पाटन में 5 हैं। शासन से रिपोर्ट मांगने पर जिला प्रशासन ने तुरंत तहसील के अधिकारियों से गांवों का सर्वे शुरू करा दिया था। अधिकारी गांव की कुल आबादी, वोटर और अब तक कराए गए विकास कार्योें की जमीनी पड़ताल करते हुए रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हुए थे कि तभी शासन से नया आदेश जारी हो गया। इसमें निकट भविष्य में होने वाली जनगणना को देखते हुए इकाइयों की सीमा में किसी भी प्रकार के परिवर्तन पर रोक लगा दी। उत्तर प्रदेश सरकार ने बाकायदा इसके लिए सरकारी गजट जारी किया है। इसमें एक जनवरी 2020 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के दौरान कोई परिवर्तन प्रभावी न करने का आदेश दिया गया है।
एक ग्रामसभा को नगर पंचायत बनने में मानक के कई बिंदुओं को पार करना पड़ता है। इसमें सबसे बड़ा पेंच आबादी का है। शासन के मानक के तहत, 20 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत को ही नगर पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है। ऐसे में छह ग्राम पंचायतों की करीब 1.20 लाख की आबादी को नगरीय सुविधाएं पाने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
-पूर्व में शासन से छह ग्रामसभाओं को नगर पंचायत बनाने के लिए आबादी, वोटर सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई थी। तहसील प्रशासन से सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही थी। इसी बीच नए शासनादेश में प्रशासनिक इकाइयों की सीमा में किसी भी प्रकार के परिवर्तन पर रोक के आदेश मिले हैं, जिसके तहत सर्वे आदि रोक दिया गया है।
-राकेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी।