मुख्य विकास अधिकारी संजीव सिंह की औचक छापेमारी में अधिशाषी अभियंता सिंचाई खंड कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यालय आने में लेटलतीफी की पोल खुल गई। सुबह 10:25 बजे कार्यालय पहुंचे सीडीओ को गिने-चुने कर्मचारी ही मौजूद मिले।
कार्यालय अध्यक्ष से लेकर दो दर्जन से अधिक अधिकारी व कर्मचारी गायब थे। सीडीओ ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश जारी किया है।
सीडीओ संजीव सिंह बुधवार सुबह एक्सईएन सिंचाई खंड कार्यालय पहुंचे। उनके पहुंचते ही कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। उन्हें एक्सईएन राजेश चंद्र, सहायक अभियंता उपखंड प्रथम उमेश चंद्र, सहायक अभियंता उपखंड द्वितीय, चतुर्थ बीडी पांडेय और सहायक अभियंता एसडीओ तृतीय मेवालाल गुप्ता गायब मिले। सीडीओ ने सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है। अनुपस्थित मिले 27 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोक दिया। सीडीओ के सामने ही एक्सईएन के स्टेनो ने रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए।
इसकी जानकारी होने पर मुख्य विकास अधिकारी ने जमकर फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारी कार्यालयाध्यक्ष के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण दें। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान सीडीओ को कर्मचारियों के सेवा अभिलेख अपूर्ण मिले। अभिलेखों को ठीक कराने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। कार्यालय परिसर के अंदर व बाहर काफी गंदगी थी। खिड़कियों की जाली टूटी थी।
इंसेट
शिकायत पंजिका मांगने पर फक्क हुए चेहरे
सिंचाई खंड कार्यालय के अधिकारी जनता की शिकायतों को कितना तवज्जो दे रहे हैं, इसका खुलासा सीडीओ के निरीक्षण में हुआ। कार्यालय पहुंचने के बाद सीडीओ ने कर्मचारियों से सुबह 10 बजे से 12 बजे के मध्य आने वाली जनता की शिकायतों की पंजिका मांगी तो इनके चेहरे फक्क पड़ गए। इस दौरान कर्मचारी न तो उच्चाधिकारियों के भ्रमण से संबंधित पंजिका दिखा सके और न ही शासनादेश की गार्ड फाइल।
पूछताछ में पता चला कि किसी भी विषय की पंजिका नहीं बनाई गई है। सीडीओ ने कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए दो दिन में सभी विषयों की पंजिका बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा वर्ष 2014-15 की ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण न कराए जाने की जानकारी भी सीडीओ को हुई।