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स्कूलों की वायरिंग में लाखों का खेल

Fri, 02 Oct 2015 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। परिषदीय विद्यालयों में वायरिंग के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला किया गया है। विद्यालयों में पंखे, बल्ब तो दूर सही तरीके से वायरिंग भी नहीं कराई गई। ठेकेदारी में हुए इस कार्य में अधिकारियों ने भी अपनी सहमति दे दी और पैसा खातों से निकल गया। वायरिंग न होने से न तो विद्यालयों में पंखे हैं और न ही बल्ब। निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी चुप्पी साध लेते हैं।
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तीन साल पहले जिले के 2039 परिषदीय विद्यालयों में वायरिंग कराने, बल्ब और सीलिंग फैन लगाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च हुए मगर मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री ने सरकारी स्कूलों की सूरत नहीं बदली। छात्र-छात्राओं के लिए शासन ने कंप्यूटर लैब की व्यवस्था की थी। इसके लिए पूर्व के वर्षों में विद्यालयों में वायरिंग कराने के साथ ही कमरे, बरामदे व कार्यालय कक्ष में बल्ब व पंखे लगाने के आदेश दिए थे।

इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में इस कार्य के लिए 26,500 रुपये का बजट भी जारी किया था। स्कूलों में सही तरीके से वायरिंग तक नहीं कराई गई। इसका असर यह रहा कि वहां न तो पंखे चल सके और न ही बल्ब जले। लेकिन पैसा खातों से निकाल लिया गया। यह व्यवस्था जिले के सोलह विकासखंडों की है।
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इन विद्यालयों में जाकर अधिकारी देखें हकीकत
यदि वास्तव में अधिकारियों को इसकी हकीकत जाननी है तो वह विकासखंड नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय खड़ेरा, बिजपरी प्रथम, कसंडा, बरुआ, निबहरी कल्याणपुर, बजेहरा, कुसुंभी, दिलवल के अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालय सेवरा, परसंदन, सेरसा, अजगैन, मकूर मलांव कुसुंभी, सरांय जोगा व कटेहरू में जाकर इसका निरीक्षण कर सकते हैं। ये ऐसे विद्यालय हैं जहां वायरिंग के नाम पर न  तो तार हैं और न ही पंखे व बल्ब।
विकासखंड सिकंदरपुर करन के परिषदीय विद्यालय गौरी त्रिभानपुर, परिषदीय विद्यालय कोलुहागाढ़ा, प्राथमिक विद्यालय बंड हमीरपुर, प्राथमिक विद्यालय भदवही, प्राथमिक विद्यालय झौहा, उच्च प्राथमिक विद्यालय रमचरामऊ व प्राथमिक विद्यालय बंदीपुरवा में बिना बत्ती व पंखे के ही संचालित हैं। यहां भी वायरिंग के नाम पर केवल धोखा हुआ है।

क्या बोले अधिकारी
-बीएसए कौस्तुभ कुमार सिंह ने बताया कि यह मामला हमारे समय का नहीं है। ग्राम शिक्षा निधि के खाते में धन आना था। कितने स्कूलों का आया इसका पता लगवाया जाएगा।

- बीईओ मुख्यालय राजेश सिंह ने बताया कि बजट ग्राम शिक्षा समिति के खाते में भेजा गया था। फर्म के माध्यम से काम होना था। उनके मुताबिक लगभग विद्यालयों में काम हुआ था अब हो सकता है दो-चार स्कूल ऐसे हों तो मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी इसकी जांच कराई जाएगी।
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